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‘धुरंधर 2’ के क्रेज के बीच दिल्ली पुलिस का अनोखा संदेश, फिल्म के सीन से दी ‘नशे को ना’ कहने की सीख

धुरंधर 2

Dhurandhar 2: आज के समय में फिल्मों का प्रभाव सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वे समाज को जागरूक करने का एक मजबूत माध्यम भी बन चुकी हैं। बड़े पर्दे पर दिखाए गए किरदार, डायलॉग और सीन अक्सर लोगों के दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ते हैं। यही वजह है कि कई सरकारी संस्थाएं और एजेंसियां भी फिल्मों के लोकप्रिय कंटेंट का इस्तेमाल सामाजिक संदेश देने के लिए करने लगी हैं। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने एक खास पहल करते हुए फिल्म ‘धुरंधर’ के एक सीन का इस्तेमाल लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश देने के लिए किया।

दरअसल, रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ के सीक्वल ‘धुरंधर-द रिवेंज’ का क्रेज इस समय लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इसी लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए पुलिस ने जागरूकता फैलाने का एक नया तरीका अपनाया है। दिल्ली पुलिस ने इंस्टाग्राम पोस्ट में फिल्म का एक छोटा सा वीडियो क्लिप दिखाया है। इस सीन में रणवीर सिंह एक डायरी खोलते नजर आते हैं और उसमें एक खास केमिकल लगाते हैं। जैसे ही वह केमिकल पेज पर लगाया जाता है, उस पर छिपा हुआ मैसेज धीरे-धीरे उभरकर सामने आता है। यह सीन फिल्म में जासूसी और रहस्य से जुड़ा है, जहां छिपी हुई जानकारी को बाहर लाने का तरीका दिखाया गया है। दिल्ली पुलिस ने इसी सीन को क्रिएटिव तरीके से एडिट किया और उसमें दिखने वाले मैसेज को बदलकर एक सामाजिक संदेश दे दिया। वीडियो में उभरते मैसेज की जगह ‘से नो टू ड्रग्स’, यानी ‘नशे को न कहें’, लिखा गया है।

इस छोटे से बदलाव के जरिए पुलिस ने एक बड़ा संदेश लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। इस पोस्ट के साथ दिल्ली पुलिस ने कैप्शन में लिखा कि असली धुरंधर वही है जो ‘नशे को ना, जिंदगी को हां’ कहे। दिल्ली पुलिस की यह पहल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसकी सराहना भी कर रहे हैं।

कैशलेस इकोनॉमी का मैसेज

ये फिल्म यह भी दिखाती है कि नोटबंदी का मकसद सिर्फ पुराने नोट खत्म करना नहीं था, बल्कि लोगों को डिजिटल पेमेंट की तरफ ले जाना भी था। नकदी पर निर्भरता कम करके एक पारदर्शी सिस्टम बनाने की बात कहानी में बार-बार सामने आती है। धुरंधर 2 नोटबंदी को लेकर एक अलग ही नैरेटिव पेश करती है, जिसमें काला धन, ISI, अंडरवर्ल्ड और डिजिटल इंडिया सबको एक साथ जोड़ा गया है। फिल्म कई जगह थ्रिलर से ज्यादा  एक्सप्लेनर बन जाती है, लेकिन अगर आप यह समझना चाहते हैं कि नोटबंदी को किस तरह एक बड़े मिशन के रूप में दिखाया गया है, तो यह फिल्म आपको एक अलग नजरिया जरूर देती है।

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