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सस्ता कच्चा तेल और बढ़ती EV बिक्री, क्या E20 से E85 तक का एथेनॉल मिशन पड़ जाएगा कमजोर?

सस्ता तेल, बढ़ती EV: क्या थमेगा एथेनॉल मिशन?
सस्ता तेल, बढ़ती EV: क्या थमेगा एथेनॉल मिशन?

Ethanol News: 6 महीने पहले तक तस्वीर कुछ और थी। ईरान-इजराइल के बीच तनाव, होर्मुज का खतरा और 100 डॉलर/बैरल के पार कच्चा तेल। उस वक्त Ethanol ही भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सबसे बड़ा सहारा लग रहा था। E20 सड़कों पर उतर गई, E25 और E85 की तैयारी शुरू हो गई, E100 तक की बातें होने लगीं।

युद्ध ने Ethanol को बूस्ट दिया था

जब अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमला किया तो होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का डर था। दुनिया की 20% तेल सप्लाई अटक सकती थी। उसी डर में सरकारों ने वैकल्पिक ईंधन की तरफ देखा। भारत में भी यही तर्क बना कि विदेशी तेल पर निर्भरता घटाओ, किसानों को बाजार दो और डॉलर बचाओ।लेकिन युद्ध के बाद सप्लाई का समीकरण ही बदल गया। UAE ने OPEC+ से अलग रास्ता ले लिया। ईरान प्रतिबंध हटने की बात कर रहा है। रूस को पैसों की जरूरत है, इसलिए वह डिस्काउंट पर तेल दे रहा है। सऊदी भी भाव कम कर रहा है। नतीजा, बाजार में तेल ज्यादा है और दाम नीचे हैं।

सस्ता तेल, बढ़ती EV और Ethanol की चुनौती

जून में तेल कंपनियों ने Ethanol 71 रुपये/लीटर खरीदा। जबकि कच्चे तेल की गिरावट के साथ पेट्रोल की लागत उससे कम बैठ रही है। अगर बैरल 60 डॉलर की तरफ गया, तो Ethanol पेट्रोल से साफ महंगा पड़ेगा। ऊपर से माइलेज का गणित भी है। Ethanol वाली गाड़ी कम किलोमीटर देती है। यानी जेब पर डबल चोट।दूसरा झटका EV की तरफ से आया। सरकार सालों से कोशिश कर रही थी, लेकिन हिस्सेदारी 7-8% पर अटकी हुई थी। ईरान युद्ध के बाद उपभोक्ता का भरोसा हिला और मई-जून में EV ने कुल बिक्री का 11% पार कर लिया।

Ethanol News:  सस्ता तेल, बढ़ती EV, क्या थमेगा एथेनॉल मिशन?
सस्ता तेल, बढ़ती EV: क्या थमेगा एथेनॉल मिशन?

दिल्ली सरकार ने ऐलान कर दिया कि आने वाले समय में थ्री-व्हीलर और टू-व्हीलर सिर्फ इलेक्ट्रिक होंगे। लोग पहले चार्जिंग को लेकर डरते थे। अब वही पैटर्न दिख रहा है, जो मारुति के समय सड़कों के साथ हुआ था। पहले गाड़ी आई, फिर सड़क की मांग हुई। अब पहले EV आएगी, फिर चार्जर हर गली में लग जाएंगे।ग्लोबल तस्वीर और साफ है। चीन में 55% नई गाड़ियां EV हैं। नॉर्वे को छोड़ दें, तो दुनिया में सबसे ज्यादा 76% नई गाड़ियां नेपाल में इलेक्ट्रिक बिक रही हैं। वजह, सस्ती हाइड्रोपावर और पहाड़ों में पेट्रोल पहुंचाने की दिक्कत। पाकिस्तान में भी यही ट्रेंड है, बस वहां बिजली की कमी आड़े आ रही है।

Ethanol News: तो Ethanol का रोल क्या बचेगा?

एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2027 के बाद दुनिया में कच्चे तेल की मांग घटना शुरू हो जाएगी। युद्ध हो या न हो, दाम बढ़ने की गुंजाइश कम दिख रही है क्योंकि हर देश ने प्लान B तैयार कर लिया है।भारत के लिए Ethanol का सबसे बड़ा तर्क अब सिर्फ एक बचा है, डॉलर की बचत। लेकिन अगर तेल सस्ता रहा और रूस-ईरान से रुपये में डील होने लगी, तो वह तर्क भी कमजोर पड़ेगा।माइलेज, इंजन पर असर और कीमत को लेकर जो विवाद अभी चल रहा है, वह तब और तेज होगा, जब पेट्रोल सस्ता हो और EV का विकल्प सामने हो।

ईरान युद्ध ने Ethanol को आगे धकेला था। अब वही भू-राजनीति और बदलता ऊर्जा बाजार कहीं Ethanol की रफ्तार धीमी न कर दे। गाड़ी 1-2 साल के लिए नहीं ली जाती। 10-15 साल का फैसला है। अगर आने वाला दशक सस्ते तेल और सस्ती बैटरी का है, तो E20 से E85 तक का रोडमैप दोबारा टेबल पर आ सकता है।फिलहाल तेल कंपनियों, ऑटो कंपनियों और पॉलिसी मेकर्स के सामने एक ही सवाल है, Ethanol को “सुरक्षा” के तौर पर आगे बढ़ाना है या “कीमत” के हिसाब से री-कैलिब्रेट करना है।

Written by- Mansi Sharma

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