Ghaziabad News: गाजियाबाद जिले के पॉश इलाके राजनगर में साइबर अपराधियों ने खौफ का ऐसा जाल बुना कि एक बुजुर्ग दंपति ने अपनी जीवन भर की जमापूंजी के 2 करोड़ 86 लाख 62 हजार रुपये गंवा दिए। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और पुलिस बताकर 70 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी को उनके ही घर में 12 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और गिरफ्तारी व सामाजिक बदनामी का डर दिखाकर इतनी बड़ी रकम लूट ली।
कैसे हुई ठगी?
साजिश की शुरुआत 13 नवंबर को बुजुर्ग के लैंडलाइन पर आई एक कॉल से हुई। फोन करने वाली महिला ने खुद को टेलीफोन कंपनी की कर्मचारी बताकर दावा किया कि उनके नाम पर मुंबई में एक अवैध सिम चल रहा है, जिसका उपयोग आपराधिक गतिविधियों में हुआ है। इसके बाद पीड़ित को डराने के लिए कॉल कथित महाराष्ट्र पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई। ठगों ने खुद को सीबीआई का डिप्टी एसपी और सरकारी वकील बताकर दंपति पर मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप मढ़ा और उन्हें 14 से 26 नवंबर तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान दंपति को हर कुछ घंटों में वीडियो कॉल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती थी और किसी को भी इस ‘गोपनीय जांच’ के बारे में बताने से सख्त मना किया गया था।
Ghaziabad News: थाने में एफआईआर दर्ज
जेल जाने के डर से बुजुर्ग दंपति ने अपनी मेहनत की कमाई की सारी एफडी तुड़वा दी और म्यूचुअल फंड का पैसा भी निकाल लिया। ठगों ने पैसों के ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ का झांसा देकर पूरी राशि आरबीआई के फर्जी एस्क्रो अकाउंट में ट्रांसफर करवा ली। 6 दिसंबर को जब बुजुर्ग को ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। गाजियाबाद पुलिस अब बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए आरोपियों की तलाश में जुटी है, साथ ही लोगों को सचेत किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पैसों के लेनदेन की बात नहीं करती है।
वहीं इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने आम जनता को सतर्क करते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी, जांच या पैसों के लेनदेन की बात नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या आरबीआई अधिकारी बताकर इस तरह का दबाव बनाए, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने को दें। यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी है कि साइबर ठग किस तरह बुजुर्गों और आम लोगों को डराकर उनकी मेहनत की कमाई लूट रहे हैं। सतर्कता और जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
Report By: विभु मिश्रा
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