Godawan Chick: गुजरात के कच्छ जिले के अबडासा क्षेत्र में जन्मा एक छोटा सा चूजा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मार्च के आखिरी सप्ताह में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, जिसे गोडावण भी कहा जाता है, का एक चूजा अंडे से बाहर आया। खास बात यह है कि यह राजस्थान के जैसलमेर स्थित रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से जन्म लेने वाला पहला चूजा है।
जन्म के तुरंत बाद ही वन विभाग ने इसकी सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया और इसे Z+ स्तर की सुरक्षा दे दी। आम तौर पर इतनी कड़ी सुरक्षा देश के बड़े वीवीआईपी लोगों को ही दी जाती है।

बेहद संकट में है यह पक्षी प्रजाति
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड दुनिया की सबसे ज्यादा खतरे में पड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक मानी जाती है। पिछले दस वर्षों में गुजरात के जंगलों में इस प्रजाति का यह पहला चूजा पैदा हुआ है। इसलिए वन विभाग के लिए इसकी सुरक्षा और देखभाल बहुत अहम हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार चूजे के जन्म के बाद का पहला महीना सबसे कठिन होता है। इस दौरान उसे सुरक्षित और स्वस्थ रखना सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है। इसी वजह से विभाग ने हर स्तर पर पूरी तैयारी की है।
Godawan Chick: सुरक्षा के लिए 50 से ज्यादा कर्मचारी तैनात
इस नन्हे चूजे की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने 50 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। इनमें फील्ड स्टाफ के साथ सहायक वन संरक्षक, उप वन संरक्षक और अनुभवी कर्मचारी भी शामिल हैं।
पूरे इलाके में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है और इसके लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों को लगाया गया है। वॉच टावरों पर स्पॉटिंग स्कोप और दूरबीन की मदद से हर समय चूजे और आसपास के क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है।
घोसले के आसपास के रास्ते बंद
चूजे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घोसले की ओर जाने वाले रास्तों को बिना शोर-शराबे के बंद कर दिया गया है। आसपास के गांवों की सड़कों पर भी आवाजाही रोक दी गई है।जहां-जहां बाड़ टूटी हुई थी, उसकी मरम्मत कर दी गई है। इसके साथ ही आसपास के इलाके में मवेशियों को चराने पर भी रोक लगा दी गई है।आवारा कुत्तों और अन्य शिकारी जानवरों को दूर रखने के लिए क्षेत्र के जलस्रोतों को भी सूखा रहने दिया गया है, ताकि वहां जानवर इकट्ठा न हों।

Godawan Chick: टैग से मिल रही है हर गतिविधि की जानकारी
मादा गोडावण लगभग 3 वर्ग किलोमीटर के घास के मैदान में घूम रही है। पिछले साल अक्टूबर में उसके शरीर पर एक विशेष टैग लगाया गया था, जिससे उसकी गतिविधियों की रीयल टाइम जानकारी मिलती रहती है।
यदि वह अचानक बेचैन हो जाए या तेज गति से चलने लगे, तो कर्मचारी कुछ ही मिनटों में उस स्थान पर पहुंच जाते हैं। उसकी हर गतिविधि की रिपोर्ट गांधीनगर और अहमदाबाद में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों तक भेजी जाती है।
विशेषज्ञों की निगरानी में चल रहा संरक्षण अभियान
इस पूरे अभियान की देखरेख जैसलमेर और कच्छ में मौजूद भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ कर रहे हैं।प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्डलाइफ) जयपाल सिंह का कहना है कि यह चूजा इस दुर्लभ पक्षी प्रजाति के संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वन विभाग इसे अपने घर के बच्चे की तरह संभाल रहा है।
उन्होंने बताया कि विभाग का पूरा स्टाफ लगातार एक-दूसरे के संपर्क में है और हर कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता से इस काम में योगदान दे रहा है।यह सुरक्षा केवल एक चूजे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरी गोडावण प्रजाति को बचाने का एक बड़ा प्रयास है।
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