Ham hindu nahi yadav hai: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जहां PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को सामाजिक न्याय का डमरू बजाते दिखते है तो वहीं उनकी ही पार्टी के एक जिलाध्यक्ष का बयान अब उसी डमरू की धुन पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सिरसागंज विधानसभा क्षेत्र के ग्राम डंडियामई का यह मामला है जहां आयोजित PDA की पाठशाला के मंच से सपा जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव ने कहा हम हिंदू नहीं, यादव हैं।
इसके बाद उन्होंने मनुस्मृति और वर्ण व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा कि ब्राह्मण मुख से, क्षत्रिय भुजाओं से और वैश्य सीने से जन्म लेते हैं, जबकि हम लोग मां की कोख से पैदा हुए इंसान हैं।
सपा नेता खींच रहे जाति धर्म की लकीर
जिलाध्यक्ष यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि देश में 90 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद दलित-पिछड़े सत्ता से बाहर हैं और सिर्फ 10 प्रतिशत लोग पूरे सिस्टम पर काबिज हैं। साथ ही आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में दलितों और पिछड़ों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या PDA की राजनीति धर्म से ऊपर समावेश की बात करती है या फिर ऐसे बयान नई जातीय और धार्मिक रेखाएं खींचने का काम करते हैं?
Ham hindu nahi yadav hai: क्या यादव हिंदू नहीं होते ?
सपा जिलाध्यक्ष के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है क्या यादव हिंदू नहीं होते? और अगर होते हैं, तो “हम हिंदू नहीं यादव हैं” कहकर आखिर किस राजनीति का संदेश दिया जा रहा है?
Ham hindu nahi yadav hai: किसे साधने का तीर ?
जैसे ही यह बयान सामने आया, राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। माना जा रहा है कि बीजेपी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर अखिलेश यादव और PDA की राजनीति को घेरने की तैयारी में है और घेरे भी क्यों न आखिर सपा के ये वीर कहना क्या चाहते है अब किसको साधने के लिए ऐसे तीर छोड़े जा रहे है अब देखना होगा यादव समुदाय इस पुरे बयान को किस तरह से देखता है।
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