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13 साल से जिंदा लाश बनकर जी रहे हरीश राणा, विदाई से पहले वायरल हुआ भावुक वीडियो

भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े पहले मामले में हरीश राणा का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 13 साल से गंभीर हालत में जिंदगी गुजार रहे हरीश को अब अंतिम विदाई दी जा रही है। हरीश राणा कभी एक होनहार इंजीनियरिंग छात्र थे, लेकिन एक भयानक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

Harish rana: भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े पहले मामले में हरीश राणा का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 13 साल से गंभीर हालत में जिंदगी गुजार रहे हरीश को अब अंतिम विदाई दी जा रही है। गाजियाबाद से उन्हें दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences (एम्स) लाया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाया जाएगा। इस बीच सामने आए एक वीडियो ने लोगों को भावुक कर दिया है। वीडियो में ब्रह्मकुमारी परिवार की एक दीदी हरीश के माथे पर टीका लगाते हुए कहती सुनाई देती हैं, “सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ… ठीक है…” यह पल देखकर वहां मौजूद लोग ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले लोग भी भावुक हो रहे हैं।

22 सेकेंड के वीडियो ने किया भावुक

करीब 22 सेकेंड के इस वायरल वीडियो में ब्रह्मकुमारी परिवार की दीदी लवली हरीश के माथे पर टीका लगाती नजर आती हैं। इस दौरान उनके स्पर्श से हरीश की आंखों में हलचल दिखती है। ऐसा लगता है जैसे वह कुछ इशारा करने की कोशिश कर रहे हों।

उनके होंठ भी हल्के से कांपते नजर आते हैं और गले से निगलने जैसी हल्की हरकत दिखाई देती है। यही दृश्य लोगों को बेहद भावुक कर रहा है।

Harish rana: सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति

इस मामले में Supreme Court of India ने 11 मार्च को हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। उनका परिवार लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहा था। जब हरीश को गाजियाबाद स्थित घर से एम्स ले जाया गया, उस समय परिवार के सभी सदस्य भावुक हो गए। उनके पिता अशोक राणा ने परिवार से माफी मांगते हुए कहा कि “न चाहते हुए भी हमें यह फैसला लेना पड़ा।”

एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी

Harish rana: हरीश राणा कभी एक होनहार इंजीनियरिंग छात्र थे, लेकिन एक भयानक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। हादसे के बाद वह ऐसी स्थिति में पहुंच गए जिसे डॉक्टर स्थायी वेजिटेटिव स्टेट कहते हैं। इस हालत में व्यक्ति न बोल पाता है, न चल पाता है और न ही अपने आसपास की दुनिया को समझ पाता है। करीब 13 साल तक मशीनों और मेडिकल सपोर्ट के सहारे जीवन बिताने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से उन्हें इच्छामृत्यु दी जाएगी। इस मामले को भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मामलों में से एक माना जा रहा है।

 

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