Health: तेज़ी से बदलती जीवनशैली, शहरीकरण और अस्वस्थ खान-पान की आदतों के कारण भारत में मधुमेह (डायबिटीज) एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। ताज़ा अध्ययनों के अनुसार देश में मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़कर लगभग 90 मिलियन (9 करोड़) तक पहुँच गई है।
भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर
इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के अनुसार भारत में 20 से 79 वर्ष आयु वर्ग के करीब 9 करोड़ वयस्क मधुमेह से पीड़ित हैं। इस आंकड़े के साथ भारत, चीन के बाद, दुनिया में मधुमेह रोगियों की संख्या के लिहाज से दूसरे स्थान पर है। चीन में लगभग 14 करोड़ और अमेरिका में करीब 3 करोड़ वयस्क मधुमेह से प्रभावित बताए गए हैं।
Health: IDF डायबिटीज एटलस और द लैंसेट अध्ययन
ये निष्कर्ष आईडीएफ डायबिटीज एटलस (11वां संस्करण) से सामने आए हैं, जिसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Diabetes & Endocrinology में प्रकाशित किया गया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में मधुमेह का बोझ और तेज़ी से बढ़ेगा।
वैश्विक स्तर पर मधुमेह की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में दुनिया भर में 589 मिलियन (58.9 करोड़) वयस्क मधुमेह से पीड़ित थे, जो वैश्विक वयस्क आबादी का 11.11 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि हर नौ में से एक वयस्क मधुमेह की चपेट में था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या बढ़कर 853 मिलियन (85.3 करोड़) तक पहुँच सकती है।
Health: किन देशों में सबसे अधिक मधुमेह?
अध्ययन में बताया गया है कि चीन, भारत और अमेरिका इन तीन देशों में ही वैश्विक मधुमेह के कुल मामलों का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा केंद्रित है। इसके अलावा, शोधकर्ताओं का अनुमान है कि पाकिस्तान 2050 तक अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है, जिससे दक्षिण एशिया में मधुमेह की गंभीर स्थिति उजागर होती है।
Health: निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर अधिक बोझ
रिपोर्ट के अनुसार मधुमेह से पीड़ित 80 प्रतिशत से अधिक लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। अनुमान है कि 2050 तक मधुमेह के मामलों में होने वाली 95 प्रतिशत से अधिक वृद्धि इन्हीं देशों में होगी। मध्यम आय वाले देशों में मधुमेह की व्यापकता सबसे अधिक दर्ज की गई है।
भारत में मधुमेह तेजी से क्यों बढ़ रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत जैसे देशों में मधुमेह बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें जनसंख्या वृद्धि और बढ़ती उम्र, तेज़ शहरीकरण, अति-प्रसंस्कृत और अस्वस्थ भोजन, तथा शारीरिक गतिविधि की कमी प्रमुख हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में गतिहीन जीवनशैली मधुमेह के जोखिम को और बढ़ा रही है।
Health: कौन है सबसे अधिक जोखिम में?
अध्ययन में पाया गया कि 75 से 79 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में मधुमेह की व्यापकता लगभग 25 प्रतिशत तक पहुँच गई है। इसके अलावा यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक और ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों में अधिक पाई गई है।
बिना निदान का खतरा
Health: रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों का एक बड़ा वर्ग अपनी बीमारी से अनजान रहता है, विशेष रूप से संसाधन-गरीब क्षेत्रों में। समय पर निदान न होने से मधुमेह के कारण हृदय रोग, गुर्दे की विफलता और दृष्टि हानि जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
Written by: Anurag Vishwakarma
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