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होर्मुज संकट के बीच भारत को बड़ी राहत: 94 हजार टन LPG लेकर 2 जहाज सुरक्षित पहुंचे

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच UAE से 94 हजार टन LPG लेकर आए दो जहाज सुरक्षित भारत पहुंचे, जबकि ईरान ने अमेरिका के लिए होर्मुज मार्ग बंद रखने की चेतावनी दी है।
Hormuz Strait Crisis:

Hormuz Strait Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के बावजूद भारत को बड़ी राहत मिली है। संयुक्त अरब अमीरात से LPG लेकर आए दो जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गए हैं। पहला टैंकर 31 मार्च को मुंबई पहुंचा, जबकि दूसरा 1 अप्रैल को न्यू मैंगलोर के पास पहुंचा। इन दोनों जहाजों के जरिए करीब 94 हजार टन रसोई गैस भारत लाई गई है। दोनों जहाजों पर 50 से अधिक भारतीय नाविक भी मौजूद थे।

सरकारी जानकारी के अनुसार अब तक कुल 8 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति बनी हुई है।

ईरान की चेतावनी, अमेरिका को लेकर सख्त रुख

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख Ebrahim Azizi ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह रास्ता केवल उन्हीं देशों के लिए खुला रहेगा, जो ईरान के तय नियमों का पालन करेंगे।

Hormuz Strait Crisis: मिडिल ईस्ट पर युद्ध का भारी असर

United Nations Development Programme की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष का असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

  • क्षेत्र की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट संभव
  • करीब 18 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
  • होर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही 70% से अधिक घटी
  • कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची
  • 16 से 36 लाख नौकरियों पर खतरा

Hormuz Strait Crisis: ईरान में अंदरूनी तनाव के संकेत

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में Islamic Revolutionary Guard Corps और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के बीच सत्ता को लेकर तनाव बढ़ रहा है। दावा है कि हालात इतने बिगड़ गए हैं कि राष्ट्रपति की सुप्रीम लीडर से मुलाकात भी नहीं हो पा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हलचल

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने होर्मुज संकट को लेकर 35 देशों की आपात बैठक बुलाने की घोषणा की है। इस बैठक में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा और संचालन पर चर्चा की जाएगी। भारत की भागीदारी की संभावना भी जताई जा रही है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है।

यह भी पढे़ : NATO पर ट्रम्प की दो टूक: ‘मदद नहीं की, कागजी शेर है’, अलग होने की चेतावनी

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