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भारत और फ्रांस के रिश्तों में नया मोड़? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा, जानिए अंदर की बात

India-France Partnership: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग असीमित है और दोनों देशों की पारस्परिक लाभकारी रणनीतिक साझेदारी की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने भारत-फ्रांस संबंधों को भरोसेमंद और भविष्य उन्मुख बताते हुए कहा कि यह साझेदारी रक्षा और उच्च स्तरीय विनिर्माण के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।

भारत-फ्रांस सहयोग की बड़ी कामयाबी

रक्षा मंत्री ने भारत-फ्रांस सहयोग की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा डिजिटल माध्यम से एच125 हेलीकॉप्टरों की फाइनल असेंबली लाइन का अनावरण किया जाना इस साझेदारी का मजबूत उदाहरण है।

उन्होंने इस पहल के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और Airbus Helicopters की टीमों को बधाई देते हुए कहा कि यह उच्च स्तरीय विनिर्माण में भारत-फ्रांस सहयोग को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

India-France Partnership: आत्मनिर्भर भारत का मूल मंत्र

राजनाथ सिंह ने कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत वर्ष 2014 से भारत की आर्थिक नीति के केंद्र में रहे हैं। इन पहलों के माध्यम से भारत पारस्परिक लाभकारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए महत्वपूर्ण तकनीकों और उच्च स्तरीय विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

तेज औद्योगिक विकास को मिली नई गति

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, प्रमुख क्षेत्रों में पूंजी निवेश और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना जैसी पहलों के माध्यम से औद्योगिक विकास को गति दी है। इसके साथ ही निवेश को आकर्षित करने के लिए उदारीकृत नीतिगत ढांचा भी तैयार किया गया है।

India-France Partnership: एमएसएमई और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विशेष जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। लक्ष्य ऐसा औद्योगिक विकास सुनिश्चित करना है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे देश वैश्विक स्तर पर शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल हुआ है। इस वृद्धि से एमएसएमई और सहायक रक्षा उद्योगों को बड़ा लाभ मिला है, जिनकी संख्या अब 16,000 से अधिक हो चुकी है।

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