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कोच्चि में ईरानी युद्धपोत की डॉकिंग पर भारत को ईरान का मानवता भरा धन्यवाद: विदेश मंत्री जयशंकर

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति दी। जहाज तकनीकी समस्याओं के कारण मदद मांग रहा था। भारत ने मानवता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मदद की, और ईरान ने आभार जताया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में इस कदम और दोनों देशों के बीच जारी डिप्लोमैटिक बातचीत की जानकारी दी।
ईरानी युद्धपोत को कोच्चि डॉक

India Iran Relations: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी। ईरान ने भारत के इस कदम की सराहना करते हुए इसे “मानवीय” बताया। इस जानकारी की पुष्टि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान की।

ईरान के साथ संवाद जारी रखा

विदेश मंत्री ने राज्यसभा में कहा कि वर्तमान स्थिति में ईरान के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बनाना कठिन है, लेकिन दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक बातचीत जारी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 फरवरी और 5 मार्च 2026 को ईरानी विदेश मंत्री अराघची से बातचीत की थी और आने वाले दिनों में यह उच्च स्तरीय संवाद जारी रहेगा।

इस दौरान जयशंकर ने कोच्चि में डॉक किए गए युद्धपोत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत ने इस जहाज को डॉक करने की अनुमति तब दी जब ईरानी नौसेना के जहाजों को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा और मदद की आवश्यकता थी।

India Iran Relations: ईरानी युद्धपोत को कोच्चि डॉक
ईरानी युद्धपोत को कोच्चि डॉक

India Iran Relations: कोच्चि में ईरानी जहाज की डॉकिंग हुई

विदेश मंत्री ने कहा, “ईरानी पक्ष ने 20 फरवरी, 2026 को अपने तीन जहाजों को हमारे पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी। भारत ने 1 मार्च, 2026 को यह अनुमति दी। आईआरआईएस लवन 4 मार्च, 2026 को कोच्चि में डॉक हुआ। क्रू अभी भारतीय नौसेना की सुविधा में सुरक्षित हैं। हमारा मानना है कि यह कदम सही था।”

ईरानी विदेश मंत्री ने इस मानवीय मदद के लिए भारत का धन्यवाद किया। जयशंकर ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और भारत की एनर्जी सुरक्षा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को सबसे प्राथमिकता दी है।

भारत का शांति और सुरक्षा पर जोर

विदेश मंत्री ने जोर दिया कि भारत शांति के पक्ष में है और सभी पक्षों से बातचीत और डिप्लोमेसी पर लौटने की अपील करता है। उनका कहना था कि तनाव को कम करना, संयम रखना और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिकता है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।जयशंकर ने अपने संबोधन के अंत में कहा, “ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार जैसे राष्ट्रीय हित हमेशा हमारे लिए सबसे ऊपर रहेंगे।”

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