Home » देश-विदेश » रिपोर्ट में खुलासा: सुरक्षित सीमा से तीन गुना ज्यादा हो चुकी दुनिया की आबादी, संकट गहराया

रिपोर्ट में खुलासा: सुरक्षित सीमा से तीन गुना ज्यादा हो चुकी दुनिया की आबादी, संकट गहराया

India Population
Spread the love

India Population: दुनिया भर में बढ़ती आबादी और संसाधनों की अंधाधुंध खपत को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने गंभीर चेतावनी जारी की है। प्रतिष्ठित जर्नल Environmental Research Letters में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, पृथ्वी पर मौजूद लगभग 8.3 अरब की आबादी प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इतनी तेज़ी से कर रही है कि ग्रह की पुनर्जीवित होने की क्षमता कमजोर पड़ती जा रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानवता वर्तमान में पृथ्वी की क्षमता से 70 से 80 प्रतिशत अधिक गति से संसाधनों का दोहन कर रही है। इसका सीधा अर्थ है कि मौजूदा जीवनशैली को बनाए रखने के लिए मानव समाज को लगभग 1.7 से 1.8 पृथ्वी जैसी क्षमता की आवश्यकता होगी जो स्पष्ट रूप से असंभव है।

कैरिंग कैपेसिटी से आगे निकल चुकी है मानवता

ऑस्ट्रेलिया की Flinders University के वैज्ञानिक Corey Bradshaw के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च में बताया गया है कि इंसान अब पृथ्वी की carrying capacity यानी वह अधिकतम सीमा, जिसके भीतर कोई प्रजाति लंबे समय तक उपलब्ध संसाधनों के सहारे टिक सकती है, को पार कर चुका है। यह अध्ययन पिछले दो शताब्दियों के जनसंख्या आंकड़ों और संसाधन उपयोग के पैटर्न पर आधारित है। रिपोर्ट बताती है कि एक समय ऐसा था जब मानव आबादी और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बना हुआ था, लेकिन 1950 के बाद तेजी से बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण और उपभोग के विस्तार ने इस संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया।

India Population: 2070 तक चरम पर पहुंच सकती है वैश्विक आबादी

शोध के अनुसार, यदि वर्तमान रुझान जारी रहते हैं तो वैश्विक जनसंख्या 2060 के दशक के अंत या 2070 तक अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। अनुमान है कि उस समय दुनिया की आबादी 11.7 से 12.4 अरब के बीच हो सकती है। वैज्ञानिक इसे नकारात्मक जनसांख्यिकीय चरण  बता रहे हैं एक ऐसी स्थिति जहां जनसंख्या वृद्धि विकास को गति देने के बजाय संसाधनों, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डालने लगती है। स्टडी का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि पृथ्वी पहले से ही मौजूदा मांग को संतुलित रूप से पूरा करने में सक्षम नहीं है। संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने “इकोलॉजिकल डेब्ट” यानी पारिस्थितिक कर्ज की स्थिति पैदा कर दी है। इसका असर कई रूपों में दिखाई दे रहा है…

* जलवायु परिवर्तन की तीव्रता

* जैव विविधता में गिरावट

* वनों की तेज़ कटाई

* जल और खाद्य संसाधनों पर बढ़ता संकट

ये सभी कारक मिलकर पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

सुरक्षित सीमा से तीन गुना अधिक आबादी

रिसर्च के अनुसार:

* अधिकतम (Maximum) carrying capacity: 11.7–12.4 अरब

* आदर्श (Optimum) carrying capacity: लगभग 2.5 अरब

इसका मतलब यह है कि वर्तमान वैश्विक जनसंख्या पृथ्वी की सुरक्षित और टिकाऊ सीमा से लगभग तीन गुना अधिक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि सभी लोगों को संतुलित, सुरक्षित और आरामदायक जीवन देना है, तो पृथ्वी की क्षमता करीब 2.5 अरब लोगों तक ही सीमित है।

India Population: अत्यधिक खपत भी जिम्मेदार

अध्ययन यह भी स्पष्ट करता है कि समस्या केवल जनसंख्या वृद्धि तक सीमित नहीं है। विकसित और समृद्ध देशों में अत्यधिक उपभोग (overconsumption) भी पर्यावरणीय संकट का बड़ा कारण है। कम आबादी होने के बावजूद यदि संसाधनों की खपत अधिक है, तो उसका प्रभाव कहीं ज्यादा गंभीर होता है। दुनिया पहले ही कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है…

* जल संकट और water bankruptcy की चेतावनियां

* वन्य जीवों की घटती संख्या

* खाद्य असुरक्षा का खतरा

* ऊर्जा संसाधनों पर बढ़ती निर्भरता

ये संकेत बताते हैं कि पृथ्वी पर संसाधनों का दबाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।

कैसे हो समाधान?

शोध में इस संकट से निपटने के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं:

* सतत (sustainable) जीवनशैली अपनाना

* संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग

* वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना

* शिक्षा और जागरूकता के जरिए जनसंख्या वृद्धि को स्थिर करना

* परिवार नियोजन को बढ़ावा देना

भविष्य के लिए चेतावनी और उम्मीद

वैज्ञानिक Corey Bradshaw का कहना है कि छोटे, संतुलित और कम खपत वाले समाज न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि मानव जीवन की गुणवत्ता भी सुधारते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि बदलाव के लिए समय तेजी से कम होता जा रहा है, लेकिन अभी भी ठोस कदम उठाकर स्थिति को सुधारा जा सकता है। यह अध्ययन एक स्पष्ट संदेश देता है आने वाले दशकों में लिए गए फैसले ही तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियों को कैसी पृथ्वी मिलेगी। यदि संसाधनों के उपयोग और जनसंख्या संतुलन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो मानव सभ्यता को गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है।

ये भी पढ़े… ‘अतीक अहमद जैसा हाल करेंगे…’ मोबाइल पर ऑडियो भेज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दी जान से मारने की धमकी, मचा बवाल

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments