India-US Trade: 10 दिसंबर, बुधवार से भारत और अमेरिका के बीच तीन दिन की व्यापार वार्ता शुरू होने वाली है। इस बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। अमेरिकी टीम का नेतृत्व उप-अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रिक स्वित्ज़र करने वाले हैं।

India-US Trade: व्यापार समझौते की राह में रेसिप्रोकल टैरिफ बड़ी बाधा
India-US Trade: 28 नवंबर को उद्योग संघ FICCI के AGM में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया था कि, “भारत और अमेरिका दो प्रकार की व्यापार वार्ताएँ कर रहे हैं। पहली वार्ता दोनों देशों के बीच नए व्यापार समझौते पर है। दूसरी वार्ता टैरिफ (यानी आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क) से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए की जा रही है। दोनों बातचीत समानांतर चल रही हैं। सरकार का कहना है कि सही समाधान ढूंढने में अब अधिक समय नहीं लगेगा और उम्मीद है कि इस वर्ष के भीतर कोई न कोई परिणाम सामने आ जाएगा।”

भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता तभी फायदेमंद होगा, जब अमेरिका द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ (आपसी बराबरी के कर) की समस्या पहले हल हो जाए। सूत्रों के अनुसार, यह व्यापार समझौता बनने में अभी कुछ समय और लग सकता है, क्योंकि इसे कई चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में मुख्य ध्यान दोनों देशों के बीच लगाए गए टैरिफ को सुलझाने पर रहेगा।
अक्टूबर 2025 में निर्यात में हुई हल्की गिरावट
India-US Trade: वाणिज्य मंत्रालय ने 17 नवंबर को भारत-अमेरिका व्यापार के नवीनतम आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि अप्रैल–अक्टूबर 2025 की अवधि में अमेरिका भारतीय निर्यातकों का शीर्ष बाजार बना रहा। भारत से अमेरिका को निर्यात अप्रैल–अक्टूबर 2024 के दौरान 47.32 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो अप्रैल–अक्टूबर 2025 में बढ़कर 52.12 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। अक्टूबर 2025 में भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में थोड़ी कमी दर्ज की गई। अक्टूबर 2024 में अमेरिका को निर्यात 6.9 अरब डॉलर था, जबकि अक्टूबर 2025 में यह घटकर 6.3 अरब डॉलर रह गया।

दोनों देश एक नए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के माध्यम से वर्तमान 190 अरब डॉलर के व्यापार को बढ़ाकर 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं। इस व्यापार समझौते पर अब तक भारत और अमेरिका के बीच छह दौर की बातचीत हो चुकी है।
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