Iran America War: ईरान के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को लेकर अमेरिका ने बड़ा दावा किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त अभियान में अपने “हर एक मकसद” को हासिल कर लिया है। पेंटागन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि यह अभियान सीमित सैन्य क्षमता के उपयोग के बावजूद बेहद प्रभावी रहा और ईरान की सैन्य ताकत को गंभीर नुकसान पहुंचा।
सैन्य अभियान की सफलता का दावा
हेगसेथ के अनुसार, इस ऑपरेशन में 40 दिनों से भी कम समय में केवल 10 प्रतिशत सैन्य क्षमता का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसके बावजूद ईरान की सैन्य संरचना को व्यापक नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना, एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल प्रोग्राम को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। यह अभियान अमेरिका और इजरायल के लिए रणनीतिक रूप से बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
Iran America War: ट्रंप की रणनीति और नरमी का संकेत
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के पास ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ठप करने की क्षमता थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर संयम दिखाया। उनके अनुसार, यह नरमी इसलिए दिखाई गई क्योंकि ईरान दबाव में आकर सीजफायर के लिए तैयार हो गया था। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की नई सरकार अब समझ चुकी है कि संघर्ष के बजाय समझौता बेहतर विकल्प है और परमाणु हथियारों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
बड़े पैमाने पर हमले और आगे की तैयारी
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने बताया कि इस अभियान के दौरान ईरान में 13,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए। उन्होंने दावा किया कि 80 प्रतिशत एयर डिफेंस सिस्टम, 90 प्रतिशत से अधिक नौसेना और हथियार फैक्ट्रियों को नष्ट कर दिया गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा सीजफायर केवल एक अस्थायी ठहराव है और यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना दोबारा अभियान शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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