Iran crisis: मुंबई के दहिसर निवासी कैप्टन वीरेंद्र विश्वकर्मा पिछले कई दिनों से Strait of Hormuz के पास अपने विशाल टैंकर और 33 क्रू मेंबर्स के साथ फंसे हुए हैं। उनके जहाज में 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर एलपीजी लदी हुई है। यह टैंकर कुवैत के मीना अल अहमदी पोर्ट से गुजरात के दीनदयाल कांडला पोर्ट के लिए रवाना हुआ था।
जहाज की धीमी रफ्तार और खतरनाक हालात
28 फरवरी से इस समुद्री मार्ग पर लगे कड़े प्रतिबंधों ने जहाज की रफ्तार रोक दी है। फिलहाल यह जहाज यूएई के पास मीना सक्र पोर्ट क्षेत्र में खड़ा है और अपनी बारी का इंतजार कर रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कैप्टन वीरेंद्र की आंखों के सामने मिसाइलें और ड्रोन गुजर रहे हैं।
Iran crisis: कैप्टन का भावुक संदेश
जहाज से भेजे गए संदेश में कैप्टन ने लिखा है: “हमारे ऊपर से मिसाइलें और ड्रोन उड़ रहे हैं। हर तरफ सायरन की आवाजें हैं और हर पल कुछ भी गलत हो सकता है। हम बस भारतीय नौसेना की सुरक्षा घेरे का इंतजार कर रहे हैं ताकि सुरक्षित घर लौट सकें।”
Iran crisis: परिवार की बेचैनी और चिंता
दहिसर में उनका परिवार हर पल डर और चिंता के साए में जी रहा है। पत्नी नील्पा विश्वकर्मा कहती हैं कि वे कई रातों से सोई नहीं हैं। उनके 10 साल के बेटे वेदांश और 12 साल की बेटी निर्वी अपने पिता की राह देख रहे हैं। इंटरनेट और व्हाट्सएप कॉल की कमी के कारण परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
बचा राशन और भारतीय नौसेना का इंतजार
Iran crisis: जहाज पर फिलहाल 60 दिनों का राशन बचा हुआ है। शिपिंग कंपनी GESCO और संबंधित मंत्रालय लगातार भारतीय नौसेना के संपर्क में हैं।
कैप्टन और उनके परिवार की अब एक ही मांग है: भारतीय नौसेना जल्द से जल्द हस्तक्षेप करे और इन 34 भारतीयों को इस खतरनाक स्थिति से सुरक्षित घर वापस लाए।
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