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12 दिन की बमबारी के बाद भी क्यों नहीं हिली ईरान की सत्ता?, जानिए US इंटेलीजेंस रिपोर्ट का सच

अमेरिका और इजरायल की ओर से लगातार हमलों के बीच ईरान भी पलटवार कर रहा है। इसी बीच अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट से संकेत मिला है कि 12 दिनों की बमबारी के बाद भी ईरान की सत्ता व्यवस्था काफी हद तक सुरक्षित बनी हुई है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के कुर्द विद्रोही समूह फिलहाल ईरानी सुरक्षा बलों के खिलाफ बड़ा खतरा पैदा करने की स्थिति में नहीं हैं।

Iran crisis: अमेरिका और इजरायल की ओर से लगातार हमलों के बीच ईरान भी पलटवार कर रहा है। इसी बीच अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट से संकेत मिला है कि 12 दिनों की बमबारी के बाद भी ईरान की सत्ता व्यवस्था काफी हद तक सुरक्षित बनी हुई है। मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा हालात में ईरान की सरकार के तुरंत गिरने का खतरा नजर नहीं आ रहा है और सत्ता ढांचा अभी भी सक्रिय है।

जनता पर नियंत्रण बरकरार

खुफिया सूत्रों का कहना है कि कई रिपोर्टों में यह सामने आया है कि ईरानी सरकार का जनता पर नियंत्रण बना हुआ है। हाल ही में तैयार की गई रिपोर्टों में भी यही संकेत मिले हैं कि लगातार हमलों के बावजूद शासन व्यवस्था स्थिर बनी हुई है। सुरक्षा कारणों से सूत्रों ने अपनी पहचान उजागर नहीं की है।

Iran crisis: ट्रंप का बड़ा बयान

जंग के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर असर देखने को मिल रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 2003 के बाद से चल रहे सबसे बड़े सैन्य अभियान को जल्द खत्म किया जा सकता है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान की कट्टरपंथी नेतृत्व व्यवस्था मजबूत बनी रहती है तो इस जंग का समाधान आसान नहीं होगा।

Iran crisis: नए नेतृत्व के साथ बनी हुई है एकता

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की धार्मिक नेतृत्व व्यवस्था में अभी भी एकजुटता बनी हुई है। 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भी सत्ता का ढांचा स्थिर है। शिया मौलवियों के संगठन ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है।

कुर्द समूहों की क्षमता पर सवाल

Iran crisis: इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के कुर्द विद्रोही समूह फिलहाल ईरानी सुरक्षा बलों के खिलाफ बड़ा खतरा पैदा करने की स्थिति में नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार उनके पास पर्याप्त हथियार और संख्या दोनों की कमी है, जिससे साफ है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना फिलहाल काफी मुश्किल नजर आती है।

 

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