Iran Vs Israel War: मिडिल ईस्ट में जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। बीते 24 घंटों में बड़े हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने बीते 24 घंटों में अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है। ईरान के मुताबिक, उसने कई अमेरिकी फाइटर जेट, अटैक एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और यहां तक कि एयरक्राफ्ट कैरियर को भी निशाना बनाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
ईरान ने साथ ही अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपने मिसाइल हमलों की 93वीं लहर शुरू करने का भी ऐलान किया है, जिससे साफ है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है। इसी बीच इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। बेरूत, जो लेबनान की राजधानी है, वहां इजरायली वायुसेना ने ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शहर में लगातार कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे दहशत का माहौल है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने शुक्रवार को अलग-अलग हमलों में दो अमेरिकी सैन्य विमानों को मार गिराया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक सैन्यकर्मी को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि कम से कम एक पायलट अब भी लापता बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब इस पांच सप्ताह से चल रहे युद्ध में अमेरिकी विमानों को सीधे नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। दो दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान को “पूरी तरह तबाह” कर दिया है और जल्द ही अपने मिशन को पूरा कर लेगा। हालांकि, एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि इन घटनाओं का ईरान के साथ चल रही संभावित वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा— “यह युद्ध है, बातचीत पर इसका असर नहीं होगा।”
उधर, ईरानी सरकारी मीडिया ने यह भी दावा किया है कि फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी A-10 हमलावर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जो ईरानी हमले के बाद गिरा। हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने इस पर संदेह जताते हुए कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विमान दुर्घटना का शिकार हुआ या उसे मार गिराया गया। कुल मिलाकर, हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और फिलहाल इस युद्ध के खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। हर गुजरते घंटे के साथ यह संघर्ष और व्यापक होता जा रहा है, जिसका असर पूरे मिडिल ईस्ट और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है।
लेखक: अरुण चौरसिया
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