Kheri Ground Report: एक ओर लखीमपुर खीरी जनपद में बड़े नेताओं की ताजपोशी का जश्न मनाया जा रहा है, तो दूसरी ओर शहर के हृदय कहे जाने वाले इलाकों की सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। थरबरन गंज मोहल्ले की सड़कें और नालियां स्थानीय लोगों के लिए नरकीय जीवन का कारण बन गई हैं। 18 दिसंबर की सुबह हमारे संवाददाता संजय कुमार राठौर ने मोहल्ले का जायजा लिया और देखा कि सड़कें अब पैदल चलने योग्य भी नहीं हैं।
सड़कें या कीचड़ का तालाब?
थरबरन गंज का मुख्य मार्ग गड्ढों और बदबूदार पानी से भरा हुआ है। हल्की बारिश या नालियों की चोकिंग के कारण जलभराव हो जाता है। बदहाल ड्रेनेज सिस्टम के कारण गंदा पानी घरों के दरवाजों तक पहुंच रहा है। फिसलन इतनी अधिक है कि राहगीर और स्कूली बच्चे अक्सर गिरकर चोटिल हो जाते हैं।
Kheri Ground Report: जनता का दर्द
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस बदहाली से अवगत कराया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक नागरिक ने बताया “हम टैक्स भरते हैं, लेकिन बदले में हमें यह कीचड़ और बीमारियाँ मिल रही हैं। शाम होते ही यहाँ से निकलना दूभर हो जाता है। बुजुर्गों और मरीजों के लिए यह रास्ता किसी काल कोठरी से कम नहीं है।”
बीमारियों का खतरा
ठंड के मौसम में रुके हुए पानी ने मच्छरों का प्रकोप बढ़ा दिया है। जलभराव की वजह से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। लोग स्वास्थ्य और जान का जोखिम उठाकर इन रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। यह केवल सड़क की बदहाली की खबर नहीं है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की विफलता का भी सबूत है। जनपद के बड़े नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभालते हैं, लेकिन अपने गृह क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज करना चिंता का विषय है। थरबरन गंज की जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। लोगों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया जाए। नालियों की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और जल निकासी के लिए पक्के इंतजाम किए जाए।
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