Lakhimpur Kheri: अगर आप बड़े ब्रांड का नाम और पैकेट पर लिखी ‘एक्सपायरी डेट’ देखकर अपनी सेहत के प्रति निश्चिंत हो जाते हैं, तो यह खबर आपकी आंखें खोल देगी। जनपद में अमूल दही के सैंपल फेल होने की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि अब ‘अमूल पनीर’ की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। नामचीन कंपनियों द्वारा गुणवत्ता के दावों की पोल खोलती यह घटना सीधे तौर पर आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ है।
पैकेट खोलते ही उड़े होश
मामला लखीमपुर खीरी का है, जहाँ एक महिला ने भरोसे के साथ ‘अमूल फ्रेश पनीर’ का पैकेट ऑर्डर किया। पैकेट पर एक्सपायरी तिथि 02 फरवरी 2026 अंकित थी, यानी तकनीकी रूप से यह पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए था। लेकिन जैसे ही महिला ने पैकेट खोला, अंदर का नजारा देख वह दंग रह गई। सफेद दूधिया पनीर की जगह अंदर काली-काली फफूंद (Fungus) जमी हुई थी।

पीड़ित महिला ने बताया कि पनीर के पैकेट से ऐसी भीषण सड़ांध और बदबू आ रही थी कि पास खड़ा होना भी दूभर हो गया। सवाल यह उठता है कि जिस उत्पाद को ‘हाइजीनिक’ और ‘सुरक्षित’ बताकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है, वह समय से पहले ही इतना जहरीला कैसे हो गया?
Lakhimpur Kheri: ब्रांड्स की साख पर सवाल?
अमूल जैसे बड़े ब्रांड से जनता को शुद्धता की उम्मीद रहती है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इन कंपनियों के ‘क्वालिटी कंट्रोल’ पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
* क्या इन प्रोडक्ट्स के स्टोरेज में लापरवाही बरती जा रही है?
* क्या मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में स्वच्छता के मानकों की अनदेखी हो रही है?
* क्या खाद्य सुरक्षा विभाग (FSDA) की ढिलाई का फायदा ये कंपनियां उठा रही हैं?
मैं संजय कुमार राठौर लखीमपुर खीरी की जनता से अपील करता हूं कि किसी भी ब्रांडेड पैकेट को खोलते समय उसकी सावधानी से जांच करें। केवल तारीख देखना काफी नहीं है, क्योंकि यह मामला साबित करता है कि एक्सपायरी से पहले ही उत्पाद जहरीला हो सकता है। इस घटना के बाद अब स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या प्रशासन इन नामी कंपनियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करेगा या जनता यूं ही ‘स्लो पॉइजन’ (धीमा जहर) खाने को मजबूर रहेगी?







