Home » उत्तर प्रदेश » लखीमपुर खीरी में ‘सफेद सोने’ का काला खेल, मिट्टी के पट्टे पर बालू की लूट, खनन विभाग की मेहरबानी से उड़ रही नियमों की धज्जियां

लखीमपुर खीरी में ‘सफेद सोने’ का काला खेल, मिट्टी के पट्टे पर बालू की लूट, खनन विभाग की मेहरबानी से उड़ रही नियमों की धज्जियां

Lakhimpur Kheri
Spread the love

Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद के मोहम्मदी तहसील क्षेत्र पलिया तहसील क्षेत्र में इन दिनों खनन माफियाओं और विभागीय सांठगांठ का एक बड़ा खेल सामने आ रहा है। कहने को तो खनन विभाग ने नियमानुसार मिट्टी निकालने का पट्टा जारी किया है, लेकिन धरातल पर इसकी आड़ में बेशकीमती बालू का अवैध खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर रात-दिन जेसीबी मशीनें धरती का सीना चीर रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।

पट्टे की आड़ में बड़ा खेल

पलिया क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों में खनन विभाग द्वारा मिट्टी के पट्टे स्वीकृत किए गए हैं। नियम यह कहता है कि निर्धारित गहराई और तय रकबे से ही साधारण मिट्टी उठाई जाएगी। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया पट्टे की आड़ में नदी के किनारे या जलमग्न क्षेत्रों के करीब से बालू निकाल रहे हैं। बाजार में मिट्टी की तुलना में बालू की कीमत कई गुना अधिक है। इसी मुनाफे के चक्कर में माफिया मिट्टी के परमिट पर अवैध रूप से बालू की ढुलाई कर रहे हैं। खनन के लिए निर्धारित मानकों (जैसे गहराई की सीमा और पर्यावरण एनओसी) का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन हो रहा है।

Lakhimpur Kheri: भारी वाहनों से टूट रही सड़कें

इस अवैध कारोबार का खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ओवरलोडेड डंपर और ट्रैक्टर-ट्रालियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। बिना किसी तिरपाल या कवर के दौड़ते बालू लदे वाहन वायु प्रदूषण फैला रहे हैं, जिससे राहगीरों और स्कूली बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। तेज रफ्तार में दौड़ते ये ‘यमदूत’ आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

हैरानी की बात यह है कि पलिया कोतवाली पुलिस और खनन विभाग की नाक के नीचे यह काला खेल हफ्तों से चल रहा है। क्या विभाग को यह दिखाई नहीं दे रहा कि पट्टे की जगह से मिट्टी निकल रही है या बालू? क्या रात के अंधेरे में चलने वाली मशीनों की गूंज शासन तक नहीं पहुंच रही? स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा सिंडिकेट चलाना मुमकिन नहीं है। मामले में एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि हम कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन जब भी जांच टीम आती है, खनन बंद कर दिया जाता है। जैसे ही टीम जाती है, काम फिर शुरू हो जाता है। यह सब मिलीभगत का नतीजा है।

Lakhimpur Kheri: कार्रवाई का इंतजार

लखीमपुर खीरी का पलिया क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन खनन माफिया इसे खोखला करने में जुटे हैं। यदि जल्द ही उच्चाधिकारियों ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो न केवल राजस्व का भारी नुकसान होगा, बल्कि क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecology) भी बिगड़ जाएगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन खनन माफियाओं पर लगाम कसता है या यह अवैध कारोबार इसी तरह ‘सफेदपोशों’ के संरक्षण में फलता-फूलता रहेगा।

Report By: संजय कुमार राठौर

ये भी पढ़े… लखीमपुर खीरी की सड़क पर खौफ, लोग खुद ढहा रहे घर, राहगीरों पर मंडरा रहा खतरा

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments