Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरूंदा क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सियासी गलियारों में सनसनी फैला दी है। सातदेव गांव में 21 दिनों तक चले भव्य महायज्ञ के समापन के बाद मंच से बाबा शिवानंद महाराज दादाजी धूनीवाले ने ऐसा बयान दिया, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नींद उड़ा दी। उनकी चेतावनी अब सिर्फ धार्मिक मंच तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है।
महायज्ञ बना शक्ति प्रदर्शन, लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी
पातालेश्वर महादेव मंदिर में 18 मार्च से 7 अप्रैल तक चले इस विशाल महायज्ञ में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। बताया जा रहा है कि इस आयोजन में करीब 41 टन सामग्री—जिसमें सोना, चांदी, कपड़े, बर्तन, ड्राई फ्रूट और जड़ी-बूटियां शामिल थीं का उपयोग किया गया। इतने बड़े आयोजन ने पहले ही क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक प्रभाव छोड़ दिया था, लेकिन समापन के दिन जो हुआ उसने इसे राजनीतिक रंग दे दिया।
Madhya Pradesh: नेतागिरी खत्म कर दूंगा
समापन समारोह में बाबा शिवानंद का अंदाज बेहद तीखा और आक्रामक था। उन्होंने खुले मंच से बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा, लेकिन सत्ताधारी बीजेपी उनके निशाने पर सबसे ज्यादा रही। बाबा ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने प्रशासन के जरिए इस धार्मिक आयोजन में बाधा डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म के काम में रुकावट डालते हैं, उनकी नेतागिरी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी।
Madhya Pradesh: मूंछ और मुंडी की प्रतिज्ञा ने बढ़ाया सियासी तापमान
बाबा शिवानंद का सबसे चर्चित बयान तब सामने आया जब उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सीहोर जिले में एक भी विधायक जीत जाता है, तो वह अपनी मूंछ ही नहीं बल्कि मुंडी भी कटवा देंगे। इस बयान को उन्होंने अपनी भीष्म प्रतिज्ञा बताया। मंच से उन्होंने यह भी कहा कि 2028 के विधानसभा चुनाव में वही होगा, जिसे वह चाहेंगे।
बुधनी से लेकर पूरे प्रदेश तक गूंज
यह बयान खास तौर पर इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह इलाका पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गढ़ माना जाता है। ऐसे में बाबा की यह खुली चुनौती सीधे तौर पर उस राजनीतिक आधार को चुनौती देती नजर आ रही है, जिसे अब तक अटूट माना जाता रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस पूरे मामले को और भी हवा दे दी है।
धर्म, आस्था और राजनीति का संगम या टकराव?
बाबा शिवानंद ने अपने बयान में कांग्रेस का भी जिक्र किया, जिससे यह साफ हो गया कि उनका निशाना सिर्फ एक दल नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में जनता और धार्मिक शक्ति मिलकर नया समीकरण तय करेगी। यही वजह है कि उनके बयान को कोई श्राप, कोई भविष्यवाणी और कोई राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहा है।इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बाबा शिवानंद की यह चुनौती सिर्फ मंच तक सीमित रहेगी या वाकई 2028 के विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा। फिलहाल, इतना तय है कि सीहोर से उठी यह आवाज अब पूरे मध्य प्रदेश की राजनीति में गूंज रही है और आने वाला वक्त ही बताएगा कि यह चेतावनी सियासत की दिशा बदलती है या सिर्फ एक सनसनी बनकर रह जाती है।
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