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महाकाल मंदिर में चढ़ावे के सोना-चांदी का होगा फिजिकल वेरिफिकेशन? महापौर ने कलेक्टर को लिखा पत्र

Mahakal temple: उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों के फिजिकल वेरिफिकेशन और पारदर्शी उपयोग की मांग को लेकर महापौर मुकेश टटवाल ने कलेक्टर को पत्र लिखा है। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की सुरक्षा और उनके पारदर्शी उपयोग को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने इस मुद्दे पर जिला कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर मंदिर में जमा स्वर्ण और रजत आभूषणों का फिजिकल वेरिफिकेशन कराने और उनके बेहतर उपयोग की मांग की है।

महापौर ने उठाई पारदर्शिता की मांग

महापौर मुकेश टटवाल ने 29 जून को भेजे गए पत्र में कहा कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान महाकाल के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए हर साल बड़ी मात्रा में सोना, चांदी, अन्य कीमती धातुएं और नकद राशि मंदिर में दान करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस पूरे चढ़ावे का रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रखा जाए।

Mahakal temple: पहले बनी थी समिति, लेकिन बीच में रुक गई प्रक्रिया

पत्र में महापौर ने बताया कि इससे पहले मंदिर में प्राप्त दान सामग्री के मूल्यांकन, सत्यापन और उचित उपयोग के लिए एक विशेष समिति बनाई गई थी, जिसमें वे स्वयं भी सदस्य थे। तत्कालीन कलेक्टर ने दान सामग्री की सूची भी उपलब्ध कराई थी और इस संबंध में बैठकें भी हुई थीं। हालांकि, बाद में चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण यह प्रक्रिया अधूरी रह गई और आगे नहीं बढ़ सकी। अब महापौर ने उसी प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का अनुरोध किया है।

मंदिर के विकास में हो सकता है दान का बेहतर उपयोग

Mahakal temple: महापौर का कहना है कि वर्तमान में मंदिर में दान का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है, लेकिन पहले से लंबित फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होना भी जरूरी है। उनका मानना है कि मंदिर में जमा सोना, चांदी, पीतल और अन्य कीमती सामग्रियों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए और यह तय किया जाए कि इनका उपयोग मंदिर के विकास और जनहित के कार्यों में किस तरह किया जा सकता है। उन्होंने पत्र के माध्यम से मंदिर प्रबंधन से आग्रह किया है कि इस प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान का पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

 

 

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