Malda SIR Protest: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1 अप्रैल को हुई एक गंभीर घटना की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है। इस घटना में ग्रामीणों ने तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। ये अधिकारी मालदा में चल रहे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान से जुड़े हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस मामले की जांच NIA को सौंपने का फैसला लिया। NIA की टीम शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पहुंचकर जांच शुरू करेगी। चुनाव आयोग ने 2 अप्रैल को जारी एक पत्र में कहा कि NIA अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की गई है।
SIR सूची जारी, सियासत गरमाई
इसी बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार को SIR प्रक्रिया से जुड़ी आठवीं सप्लीमेंट्री सूची जारी कर दी। आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में करीब 52 लाख लंबित मामलों का निपटारा कर लिया गया है। आयोग ने उम्मीद जताई है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया अगले चार दिनों में पूरी हो सकती है।
इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल फिर से गर्म हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं।

SIR सूची में अब केवल 8 लाख मामले बाकी
चुनाव आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने अब तक मतदाता सूची से लगभग 35 से 40 प्रतिशत नाम हटा दिए हैं। उन्होंने बताया कि करीब 52 लाख लंबित मामलों की जांच और उनका निपटारा गुरुवार शाम तक पूरा कर लिया गया है। अब लगभग 8 लाख आवेदनों पर काम बाकी है। अगर इसी गति से काम जारी रहा, तो 7 अप्रैल तक पूरी प्रक्रिया खत्म हो सकती है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में चुनाव का पहला चरण 23 अप्रैल को होने वाला है, जबकि पहले चरण के लिए नामांकन भरने की अंतिम तारीख 6 अप्रैल है। इसलिए मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
Malda SIR Protest: मालदा हिंसा में हाईकोर्ट के वकील की भूमिका की जांच
1 अप्रैल को मालदा के सुजापुर इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील मोफक्करुल इस्लाम ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे। वह AIMIM के पूर्व उम्मीदवार भी रह चुके हैं। पुलिस अब SIR से जुड़ी इस हिंसा में उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
दोपहर में शुरू हुआ विरोध, शाम तक अधिकारियों को बनाया बंधक
मालदा में यह विरोध प्रदर्शन सबसे पहले कालियाचक-2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था और देर रात तक चलता रहा। शुरुआत में प्रदर्शनकारी न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग कर रहे थे। जब उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, तो शाम करीब 4 बजे उन्होंने प्रदर्शन तेज कर दिया और पूरे परिसर को घेर लिया। इस दौरान अधिकारियों को लगभग साढ़े सात घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया।
पुलिस ने इस मामले में गुरुवार को 17 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली समेत 16 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
गिरफ्तारी के बाद शाहजहां अली ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि उन्हें उनकी राजनीतिक पहचान के कारण इस मामले में फंसाया जा रहा है।
Malda SIR Protest: दूसरे दिन भी कई जिलों में प्रदर्शन
कालियाचक की घटना के बाद मालदा में दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया और सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताया।
मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पूर्व बर्धमान जिलों में भी कई जगहों पर लोगों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और शांतिपूर्ण जुलूस निकाले। इन सभी क्षेत्रों में 23 अप्रैल को मतदान होना है।
SIR प्रक्रिया के खिलाफ विरोध कई जिलों में फैल गया। जलपाईगुड़ी में गुरुवार सुबह लोगों ने मैनागुड़ी में NH-27 को जाम कर दिया। इसके अलावा मैनागुड़ी-लतागुड़ी सड़क और चुराभंडार के पास एशियन हाईवे के मैनागुड़ी-धूपगुड़ी हिस्से को भी बंद कर दिया गया।
कूच बिहार में स्थानीय लोगों ने पचगढ़ इलाके के मदरसा मोड़ पर कूच बिहार-माथाभांगा राज्य राजमार्ग को लगभग तीन घंटे तक जाम रखा। वहीं पूर्व बर्धमान के शक्तिगढ़ में एक मौन जुलूस निकाला गया और बर्दवान-II ब्लॉक के BDO को एक ज्ञापन सौंपा गया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
घटना सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत संज्ञान लिया और इसे न्यायिक व्यवस्था में बाधा डालने की एक गंभीर और जानबूझकर की गई कोशिश बताया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने चिंता जताई कि पहले से जानकारी होने के बावजूद राज्य प्रशासन समय पर सुरक्षा उपलब्ध कराने में नाकाम रहा।
कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान उन्हें खाना-पानी तक नहीं दिया गया। अदालत ने इसे सुनियोजित और उकसावे वाली घटना बताया। अदालत ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि उपद्रव में कौन लोग शामिल हैं और उनका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना तथा चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना है।
कोर्ट के अनुसार, घेराव दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुआ था। कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने राज्य प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की, लेकिन रात 8:30 बजे तक कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद उन्होंने गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से संपर्क किया।
Malda SIR Protest: देरी पर कोर्ट सख्त, नोटिस जारी
अधिकारियों के घर लौटते समय उनके वाहनों पर ईंट और डंडों से हमला भी किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन की इस देरी की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह निराशाजनक है कि राज्य के शीर्ष अधिकारियों से समय पर संपर्क नहीं हो सका।
अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है कि समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल देश के सबसे ज्यादा ध्रुवीकृत राज्यों में से एक बन चुका है।
ममता बनर्जी का बयान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद के सागरदिघी और सूती में आयोजित रैलियों में इस घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को जज या न्यायिक अधिकारियों को छूने का अधिकार नहीं है। लोगों को विरोध करने का अधिकार जरूर है, लेकिन हिंसा बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती।
इसके साथ ही ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और BJP पर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि BJP और केंद्र सरकार मालदा की घटना का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल को बदनाम करने और केंद्र के हस्तक्षेप का माहौल बनाने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP कई तरह की योजनाएं बना रही है और केंद्र सरकार उसका साथ दे रही है। ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा कि लोगों को दंगों की राजनीति में नहीं फंसना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि उनकी शक्तियां सीमित कर दी गई हैं और राज्य को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से उन्हें मालदा की घटना की जानकारी तक नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रहा।







