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देहरादून में पूर्व सैनिकों से संवाद में मोहन भागवत ने कहा, राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका सबसे अहम

Mohan Bhagwat Dehradun: मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना और संगठन शक्ति पर निर्भर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब समाज मजबूत और अनुशासित होता है, तभी राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त बनती है।

पूर्व सैनिकों के साथ प्रमुख संवाद कार्यक्रम

उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद’ में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में छह सेवानिवृत्त जनरल, वाइस एडमिरल, डीजी कोस्ट गार्ड, ब्रिगेडियर और 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारी मौजूद रहे।

Mohan Bhagwat Dehradun: समाज की संगठित शक्ति पर जोर

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि समाज का चरित्रवान और अनुशासित नेतृत्व ही राष्ट्र को दिशा देता है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर क्रांतिकारी आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्र चेतना कभी समाप्त नहीं हुई।

संघ का उद्देश्य राजनीति नहीं, व्यक्ति निर्माण

उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि चरित्रवान नागरिकों का निर्माण है। व्यक्ति सशक्त होगा तो राष्ट्र स्वतः सशक्त बनेगा।

Mohan Bhagwat Dehradun: राष्ट्रीय सुरक्षा, अग्निवीर और पड़ोसी देश

अग्निवीर योजना पर भागवत ने इसे एक प्रयोग बताते हुए अनुभव के आधार पर सुधार की आवश्यकता बताई। कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए उन्होंने पड़ोसी देशों से जुड़ी चुनौतियों पर सतर्क नीति की जरूरत पर बल दिया।

सामाजिक समरसता और संवाद की अपील

हिंदू पहचान पर उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टि “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से प्रेरित है। सोशल मीडिया पर बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए उन्होंने शास्त्रार्थ और सार्थक संवाद की परंपरा को पुनर्जीवित करने की बात कही।

Mohan Bhagwat Dehradun: पूर्व सैनिकों से सेवा में जुड़ने का आह्वान

भागवत ने कहा कि सीमाओं के साथ-साथ समाज के भीतर भी सेवा और संघर्ष जरूरी है। उन्होंने संघ के 1.30 लाख से अधिक सेवा प्रकल्पों से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि शताब्दी वर्ष में पूर्व सैनिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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