Mohan Yadav Rangpanchmi: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राचीन अवंतिका नगरी में सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान परंपरागत रूप से सैनिक छावनियों से सैनिक विजयी पताका और चिन्ह लेकर चल समारोह के रूप में नगर में उत्सव मनाते थे। बाद में इस उत्सव को गेर नाम दे दिया। यह प्राचीन परंपरा आज भी कायम है। यह परंपरा हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
प्राचीन परंपरा का स्मरण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्राचीन अवंतिका नगरी में सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल में सैनिक छावनियों से विजयी पताका और चिन्ह लेकर नगर में चल समारोह आयोजित किया जाता था। बाद में इस उत्सव को गेर के नाम से जाना गया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
Mohan Yadav Rangpanchmi: मंदिर में ध्वज और शस्त्र पूजन
रंगपंचमी के अवसर पर डॉ. यादव ने सुबह श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल का पूजन-अभिषेक किया। इसके बाद मंदिर के सभा मंडप में श्री वीरभद्र एवं श्री महाकाल ध्वज के साथ शस्त्रों का विधिपूर्वक पूजन किया। मुख्यमंत्री ने ध्वज हाथ में लेकर मंदिर के कुंड परिसर तक चल समारोह का नेतृत्व किया।

गेर की परंपरा को निरंतर बनाए रखने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि उज्जैन में परंपरागत रूप से निकलने वाले चल समारोह (गेर) की परंपरा को बनाए रखने हेतु सवा-सवा लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाए।
Mohan Yadav Rangpanchmi: फूलों की होली और आमजन का उत्साह
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टॉवर चौक में आमजन के साथ फूलों की होली खेली। उन्होंने कहा, “जीवन में रंग भले कितने भी हों, असली रंग तो दिल के रंग होते हैं, जो सम्मान, भाईचारा और देशभक्ति से भरे हों।”
इसके बाद मुख्यमंत्री और नागरिकों ने मिलकर ‘ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का’ गाना गाया। इस गाने और उत्सव के चलते पूरे उज्जैन में रंगों और खुशियों का माहौल छा गया। उज्जैनवासियों ने मुख्यमंत्री का उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया और रंगपंचमी का जश्न सड़कों पर रंगों और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
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