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Muzaffarnagar : सरकारी दफ्तरों पर करोड़ों टैक्स बकाया

Muzaffarnagar : सरकारी दफ्तरों पर करोड़ों टैक्स बकाया

Muzaffarnagar News : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में अब टैक्स वसूली को लेकर नगर पालिका ने कड़ा रुख अपना लिया है। हैरानी की बात यह है कि शहर के सबसे बड़े बकायदार कोई निजी संस्थान नहीं, बल्कि सरकारी विभाग ही हैं। मुजफ्फरनगर नगर पालिका के रिकॉर्ड के मुताबिक जिला अस्पताल, सदर तहसील, विकास भवन, मंडी समिति और एसएसपी कार्यालय जैसे प्रमुख सरकारी भवनों पर जलकर और गृहकर मिलाकर 5 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया चला आ रहा है। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में पहुंचते ही नगर पालिका ने इन बकायों की वसूली के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

नगर पालिका का कहना है कि साल खत्म होने से पहले अधिक से अधिक राजस्व वसूली करना जरूरी है, ताकि विकास कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए। इसी उद्देश्य से बड़े बकायदारों पर फोकस किया जा रहा है, जिनमें कई सरकारी विभाग शामिल हैं। नगर पालिका की टीम इन विभागों को लगातार नोटिस भेज रही है और भुगतान के लिए समय-सीमा तय की जा रही है।

रेवेन्यू विभाग के अनुसार, सबसे ज्यादा बकाया मंडी समिति पर है, जिस पर करीब 3 करोड़ 65 लाख रुपये जलकर और गृहकर के रूप में बकाया है। हालांकि इसमें से लगभग 20 लाख रुपये की राशि जमा कराई जा चुकी है। इसके अलावा जिला अस्पताल मुजफ्फरनगर पर करीब 32 लाख रुपये, विकास भवन मुजफ्फरनगर पर लगभग 33 लाख 70 हजार रुपये, सदर तहसील मुजफ्फरनगर पर करीब 20 लाख रुपये और एसएसपी कार्यालय मुजफ्फरनगर पर लगभग 96 लाख रुपये का बकाया बताया जा रहा है।

नगर पालिका प्रशासन अब केवल नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक स्तर पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। बताया जा रहा है कि टैक्स वसूली में लापरवाही बरतने पर नगर पालिका की ईओ प्रज्ञा सिंह ने जनवरी माह में राजस्व निरीक्षकों का वेतन तक रोक दिया था। इसका साफ संदेश है कि बकाया वसूली में किसी भी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस पूरे मामले पर नगर पालिका की रेवेन्यू इंस्पेक्टर पारुल यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति नजदीक है और तय लक्ष्य को पूरा करना जरूरी है। इसी वजह से बड़े बकायदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल, तहसील, विकास भवन और मंडी समिति जैसे विभागों पर वर्षों से बकाया चला आ रहा है, जिसे मार्च से पहले वसूलने की कोशिश की जा रही है। कुल मिलाकर करीब 5 से 5.5 करोड़ रुपये का टैक्स विभिन्न सरकारी विभागों पर बकाया है।

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