New Delhi: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को भारतीय पासपोर्ट की कानूनी स्थिति को लेकर चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए कानून में संशोधन की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि पासपोर्ट और आधार कार्ड दोनों को भारतीय नागरिकता के वैधानिक प्रमाण के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, जब तक कि उन्हें राज्य द्वारा रद्द या वापस नहीं ले लिया जाता।
दशकों से विश्वसनीय दस्तावेज़ माना जाता है पासपोर्ट
थरुर ने कहा कि सरकार ने अपने पक्ष में कहा है कि यह स्थिति 1967 के पासपोर्ट अधिनियम की धारा 20 पर आधारित है। इस प्रावधान के तहत विशेष परिस्थितियों, जैसे जनहित में, सरकार गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। हालांकि, थरूर का कहना है कि आम नागरिक के लिए दशकों से पासपोर्ट पहचान और नागरिकता का सबसे विश्वसनीय दस्तावेज़ माना जाता रहा है।
New Delhi: कड़ी जांच के बाद ही बनता है पासपोर्ट
शशि थरूर ने आधार कार्ड का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार केवल पहचान और पते का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। इससे ऐसी स्थिति बन गई है कि करोड़ों भारतीयों के पास सरकार द्वारा जारी दस्तावेज होने के बावजूद उनके पास नागरिकता का कोई निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जाता।
New Delhi: कानून में संशोधन किया जाय
New Delhi: गैर-नागरिक निवासियों के लिए अलग आधार कार्ड
थरूर ने कहा कि इससे नागरिकों और गैर-नागरिकों के बीच स्पष्ट अंतर होगा और सभी भारतीय नागरिकों के लिए सामान्य आधार या वैध पासपोर्ट को नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण माना जा सकेगा। इससे पहचान सत्यापन की प्रक्रिया सरल होगी और अनावश्यक प्रशासनिक विवादों का अंत हो सकेगा।
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