Nirmala Sitharaman: दालों और तिलहनों के उत्पादन को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की सलाह को गलत तरीके से पेश कर राज्य की जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
राज्यों को दी गई थी साझा जिम्मेदारी की सलाह
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को दालों और तिलहनों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की सलाह दी थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्यों ने इस पहल को सहकारी संघवाद की भावना के तहत सकारात्मक रूप से स्वीकार किया, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने इसे विवाद का मुद्दा बना दिया।
Nirmala Sitharaman: आत्मनिर्भरता बनाम आयात पर निर्भरता
सीतारमण ने कहा कि दालों और खाद्य तेलों के लिए आयात पर निर्भरता देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार किसानों को इन फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के बजाय विदेशी आयात पर निर्भरता क्यों बढ़ा रही है। उनका कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाना न केवल आर्थिक जरूरत है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद जरूरी है।
केंद्र ने सार्वजनिक किया पत्र
मुख्यमंत्री स्टालिन के आरोपों के जवाब में वित्त मंत्री ने राज्यों को भेजा गया पत्र सार्वजनिक किया। इसमें बताया गया है कि देश में धान और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए किसानों को तिलहन और दालों की खेती के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि संतुलन बेहतर होगा।
Nirmala Sitharaman: पोषण और आर्थिक स्थिरता पर जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि दालों, तिलहनों और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाकर देश ‘पोषण सुरक्षा’ और ‘आर्थिक स्थिरता’ दोनों लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्टालिन केंद्र और राज्य के बीच दरार पैदा करने और खुद को किसानों का रक्षक दिखाने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य तेलों, विशेषकर पाम ऑयल के आयात का बड़ा कारण घरेलू उत्पादन की कमी है। ऐसे में किसानों को सही दिशा में प्रोत्साहित करना समय की मांग है, ताकि देश आत्मनिर्भर बन सके।
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