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गौमाता पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ का पोस्टर लॉन्च, 6 फरवरी को देशभर में होगी रिलीज

कार्यक्रम के दौरान आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि कृषि प्रधान भारत में गौमाता का महत्व हमारे पूर्वजों ने गहराई से समझा था और गौ संरक्षण हमारे अस्तित्व से जुड़ा विषय है, क्योंकि गाय केवल देती है, लेती नहीं। वहीं सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज ने कहा कि फिल्म ‘गोदान’ गौमाता के महत्व को देश और दुनिया तक पहुंचाने का कार्य करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक गौमाता को प्रत्यक्ष रूप से कृषि से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक उसका संरक्षण संभव नहीं है।
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Noida news: नोएडा के सेक्टर-12 स्थित भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर में गौमाता पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ का पोस्टर, टीज़र और गीतों का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम में सनातन संस्कृति से जुड़े देश के प्रमुख आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्वों ने सहभागिता की और गौमाता के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

संतों और सामाजिक विभूतियों ने रखा गौ संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत गौपूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज, आचार्य बालकृष्ण जी, स्वामी दीपांकर जी, महामंडलेश्वर भैयादास जी, आचार्य प्रतिष्ठा जी, बाबा सत्य नारायण मौर्य जी, सुरेश चव्हाणके जी, कवि डॉ. हरिओम पंवार जी सहित अनेक संत-महात्मा और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। नोएडा सांसद डॉ. महेश शर्मा, नगर के गणमान्य नागरिकों और 50 से अधिक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

Noida news: “गौ संरक्षण अस्तित्व से जुड़ा विषय”

आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि कृषि प्रधान भारत में गौमाता का महत्व हमारे पूर्वजों ने भली-भांति समझा था। गौ संरक्षण हमारे अस्तित्व को बचाने का प्रयास है, क्योंकि गाय केवल देती है, लेती नहीं। सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज ने कहा कि यह फिल्म गौमाता के महत्व को देश-दुनिया तक पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक गौमाता को प्रत्यक्ष रूप से कृषि से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक उसका संरक्षण संभव नहीं है।

Noida news: संतों ने साझा किए अनुभव और दृष्टिकोण

स्वामी दीपांकर जी ने गौमाता को हिंदू संस्कृति का प्राण बताते हुए कहा कि गौसेवा से ही राष्ट्र में क्रांति संभव है। महामंडलेश्वर भैयादास जी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गौसेवा के माध्यम से उन्हें प्रतिदिन लाखों लोगों को भोजन कराने की सामर्थ्य मिली है। आचार्य प्रतिष्ठा जी ने कहा कि गौ, गंगा, गायत्री, यज्ञ, योग और आयुर्वेद के माध्यम से ही भारत विश्व में अपनी सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा। वहीं बाबा सत्य नारायण मौर्य जी और कवि डॉ. हरिओम पंवार जी ने कविता और गीतों के जरिए राष्ट्रबोध और गौसंरक्षण का संदेश दिया।

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सामाजिक पहलुओं को दर्शाती है ‘गोदान’

फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता विनोद कुमार चौधरी और डॉ. पारुल चौधरी (दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति) हैं, जबकि सह-निर्माता चेतन गोस्वामी और निर्देशक अमित प्रजापति हैं। फिल्म की कहानी एक बछिया और उसके नायक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हिंदू धर्म में गाय के विशेष स्थान को रेखांकित करती है। निर्माता विनोद चौधरी ने बताया कि यह फिल्म गाय के धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं के साथ-साथ संस्कृति और मानवता के आपसी संबंधों को भी दर्शाती है।

गौमाता संरक्षण का संकल्प

फिल्म के प्रमोशन के लिए देशभर के विभिन्न राज्यों और शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति, दीनदयाल धाम मथुरा के अध्यक्ष महेश गुप्ता और मंत्री हरिशंकर जी भी उपस्थित रहे। करीब 1500 लोगों की सहभागिता के साथ यह आयोजन गौमाता के संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश बनकर सामने आया। मंच संचालन युवा कवि अमित शर्मा ने किया।

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