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NSA हिरासत पर सवाल: सोनम वांगचुक को जेल में फर्श पर सोना पड़ रहा, पत्नी का दावा

 NSA Sonam Wangchuk:

 NSA Sonam Wangchuk: लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दावा किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए सोनम वांगचुक को जेल में बेहद कठिन हालात में रखा गया है। उन्होंने कहा कि सोनम को फर्श पर कंबल बिछाकर सोना पड़ रहा है और उनके पास कोई फर्नीचर तक नहीं है।

बैरक में टहलने तक की जगह नहीं

न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में गीतांजलि आंगमो ने कहा कि सोनम जिस बैरक में बंद हैं, वहां इतनी जगह भी नहीं है कि वे ठीक से चल सकें। उन्होंने हिरासत की परिस्थितियों को अमानवीय बताते हुए चिंता जताई।

NSA Sonam Wangchuk: नियमों का उल्लंघन करने का आरोप

गीतांजलि आंगमो ने कहा कि NSA के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 5 से 10 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए, लेकिन सोनम वांगचुक को जरूरी वीडियो और दस्तावेज 28वें दिन दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह NSA की धारा 8 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके आधार पर हिरासत आदेश रद्द होना चाहिए था।

NSA Sonam Wangchuk: FIR और हिरासत आदेश पर सवाल

आंगमो ने बताया कि हिरासत के आधार के रूप में जिन पांच FIR का हवाला दिया गया है, उनमें से तीन में सोनम वांगचुक का नाम ही नहीं है। जिन दो FIR में नाम है, उनमें से एक अगस्त 2025 की है, जिसमें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही पूछताछ हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला मजिस्ट्रेट का हिरासत आदेश पुलिस के प्रस्ताव की कॉपी-पेस्ट है।

 जेल के अनुभव पर किताब लिख रहे सोनम

गीतांजलि आंगमो ने बताया कि सोनम वांगचुक जेल में अपने अनुभवों पर एक किताब लिख रहे हैं, जिसका संभावित शीर्षक फॉरएवर पॉजिटिव’ हो सकता है। उन्होंने कहा कि सोनम जेल में चींटियों के व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं और उन्हें टीमवर्क व एकता का प्रतीक मानते हैं। आंगमो के मुताबिक, वांगचुक को लंबे समय तक घड़ी उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्होंने धूपघड़ी और समय से जुड़ी किताबें मंगवाई थीं। उन्हें किसी भी तरह का डिवाइस, यहां तक कि मैकेनिकल घड़ी रखने की भी अनुमति नहीं है।

इस कारण से हिरासत में लिए गए वांगचुक 

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और करीब 90 लोग घायल हुए थे।

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