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88 साल के रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को पद्मश्री

88 वर्षीय रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को केंद्र सरकार ने पद्मश्री अवॉर्ड के लिए चुना है। डीआईजी पद से रिटायर होने के बावजूद सिद्धू आज भी पूरी तरह सक्रिय हैं और बीते एक दशक से चंडीगढ़ में अपने आस-पास की सड़कों और सार्वजनिक जगहों की सफ़ाई में जुटे हुए हैं। इंदरजीत सिंह सिद्धू का कहना है कि सफ़ाई अभियान की प्रेरणा उन्हें सार्वजनिक सेवा में बिताए अपने वर्षों और अमेरिका में बेटे से मिलने के दौरान मिली।

Padmshree: 88 वर्षीय रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को केंद्र सरकार ने पद्मश्री अवॉर्ड के लिए चुना है। डीआईजी पद से रिटायर होने के बावजूद सिद्धू आज भी पूरी तरह सक्रिय हैं और बीते एक दशक से चंडीगढ़ में अपने आस-पास की सड़कों और सार्वजनिक जगहों की सफ़ाई में जुटे हुए हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-49 में रहने वाले सिद्धू रोज़ाना झाड़ू और कचरा बैग लेकर निकलते हैं और बिना किसी दिखावे के सड़कों से कचरा उठाते हैं। पिछले साल उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह अपने घर के पास सड़कों और पब्लिक एरिया की सफ़ाई करते नज़र आए। इस वीडियो के बाद लोगों ने उनकी जमकर सराहना की और उन्हें आधिकारिक पहचान मिली।

ज़्यादातर समय सफ़ाई को समर्पित

इंदरजीत सिंह सिद्धू सेक्टर-49 स्थित IAS/IPS सोसाइटी में रहते हैं और अपना ज़्यादातर समय अपनी सोसाइटी व आसपास के इलाकों को साफ़ रखने में लगाते हैं। वह मूल रूप से पंजाब के संगरूर ज़िले के धूरी स्थित बुगरा गांव के रहने वाले हैं। लोगों के वीडियो बनाने या देखने के बावजूद उन्होंने कभी अपना काम नहीं रोका। सिद्धू का साफ कहना है कि उनका मकसद सिर्फ़ अपने आसपास के माहौल को स्वच्छ और हरा-भरा बनाए रखना है। उनकी इस पहल की सराहना करते हुए पिछले साल 15 अगस्त को गवर्नर द्वारा उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की गई थी, हालांकि अचानक मिली सोशल मीडिया अटेंशन से असहज होकर वह उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

Padmshree: 1963 में की थी पुलिस सेवा की शुरुआत

इंदरजीत सिंह सिद्धू 1963 में पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्यम से इंस्पेक्टर के तौर पर पंजाब पुलिस में भर्ती हुए थे। 1981 में उन्हें IPS कैडर में प्रमोशन मिला। पंजाब में आतंकवाद के कठिन दौर के दौरान उन्होंने 1986 में अमृतसर में सिटी एसपी के रूप में अहम ज़िम्मेदारी निभाई। बाद में वह चंडीगढ़ में DIG (CID) पद पर तैनात रहे और 31 दिसंबर 1996 को सेवा से रिटायर हुए।

Padmshree: निजी जीवन और सादगी

सिद्धू की पत्नी दविंदर पाल कौर का 2023 में निधन हो गया था। उनका बेटा अपने परिवार के साथ अमेरिका में रहता है, जबकि बेटी मोहाली में रहती हैं। वह मोबाइल फ़ोन नहीं रखते और मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं। जब उनका वीडियो वायरल हुआ, तो वह कुछ समय के लिए चंडीगढ़ छोड़कर बेटी के पास चले गए थे।

कहां से मिली प्रेरणा

Padmshree: इंदरजीत सिंह सिद्धू का कहना है कि सफ़ाई अभियान की प्रेरणा उन्हें सार्वजनिक सेवा में बिताए अपने वर्षों और अमेरिका में बेटे से मिलने के दौरान मिली। उनका मानना है कि स्वच्छता सिर्फ़ सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है।

 

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