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दिल्ली पालम अग्निकांड: 9 जिंदगियां हुई राख, मां-बेटी की आखिरी सांस तक साथ लड़ाई

पालम आग हादसा, 9 की दर्दनाक मौत

Palam Fire Tragedy: दिल्ली के पालम इलाके में मंगलवार को एक भयानक आग लग गई, जिसने पूरे कश्यप परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी। आग इतनी तेजी से फैली कि 9 लोगों की जान चली गई। इस दर्दनाक घटना में मां-बेटी की आखिरी क्षणों तक साथ रहने की कहानी रूह कंपा देने वाली है।

मां-बेटी ने साथ नहीं छोड़ा एक-दूसरे को

हादसे की कल्पना ही दिल दहला देती है। जब आग तेजी से फैल रही थी, तो बेटी हिमांशी अपनी बुजुर्ग मां लाडो को बचाने के लिए पीछे नहीं हटीं। मां ने कहा, “मैं तेज़ नहीं भाग सकती, तुम जल्दी बाहर चली जाओ,” लेकिन हिमांशी ने जवाब दिया, “नहीं मां, मैं आपको अकेला नहीं छोड़ूंगी। हम दोनों साथ ही बाहर जाएंगे।” इसके बाद दोनों बाथरूम में छिपने गईं, लेकिन कास्मेटिक और प्लास्टिक की वजह से आग इतनी फैल गई कि मां-बेटी की जली लाशें एक साथ मिलीं।

Palam Fire Tragedy: पालम आग हादसा, 9 की दर्दनाक मौत
पालम आग हादसा, 9 की दर्दनाक मौत

Palam Fire Tragedy: आग में फंसे परिवार के अन्य सदस्य

कश्यप परिवार के अन्य सदस्य भी तीसरी मंजिल पर फंसे थे और मदद की गुहार लगा रहे थे। बेटे कमल और प्रवेश, कमल की पत्नी आशु और उनके तीन बच्चे, साथ ही अनिल की पत्नी दीपिका भी आग की चपेट में आए। नीचे कूदने वाले दो भाई अनिल और सचिन का इलाज अलग-अलग अस्पताल में चल रहा है।

हाइड्रोलिक लैडर में देरी

हादसे के समय फायर ब्रिगेड के हाइड्रोलिक लैडर सही तरीके से काम नहीं कर पाए। जांच में पता चला कि पहली गाड़ी छोटी होने की वजह से मदद समय पर नहीं पहुंची। तब तक परिवार ऊपर फंसा रहा और पड़ोसियों ने शटर तोड़कर मदद करने की कोशिश की।

पालम आग हादसा, 9 की दर्दनाक मौत
पालम आग हादसा, 9 की दर्दनाक मौत

पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बयान

पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने बताया कि लाडो ज्यादातर घर में ही रहती थीं। बेटी हिमांशी ने अपनी मां को बचाने के लिए अंतिम क्षण तक साथ रही। परिवार की बहन बाला भी घटना वाले दिन बिल्डिंग के नीचे आई, लेकिन तब तक वह नहीं जान पाई थीं कि लाडो की हालत कितनी गंभीर है।

Palam Fire Tragedy: राजनीतिक बयानबाजी

इस हादसे के बाद बीजेपी और आम आदमी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में विवाद भी हुआ। पीड़ित राजेंद्र कश्यप के सामने ही सौरभ भारद्वाज और बीजेपी विधायक कुलदीप सोलंकी के बीच बहस और धक्कामुक्की तक हुई।

दिल्ली पालम आग हादसा सिर्फ आग का नहीं, बल्कि परिवार और मानवता की हिम्मत और दर्द की कहानी भी है। हिमांशी ने अपनी मां को बचाने के लिए अंतिम समय तक कोशिश की, लेकिन आग के सामने मानव शक्ति असहाय साबित हुई।

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