PARLIAMENT NEWS: दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर गुरुवार को लोकसभा में विस्तार से चर्चा होने जा रही है। विपक्षी सांसदों ने प्रदूषण के गंभीर हालात और मौजूदा उपायों की प्रभावशीलता को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।
शाम 5 बजे जवाब देंगे पर्यावरण मंत्री
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव शाम पांच बजे लोकसभा में वायु प्रदूषण से जुड़े सवालों और सुझावों पर सरकार का पक्ष रखेंगे। वे इस मुद्दे पर हो रही आलोचनाओं का जवाब देने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार की रणनीति भी सदन के सामने रखेंगे।
PARLIAMENT NEWS: विपक्ष ने उठाए तैयारी और नीति पर सवाल
इससे पहले संसद में कई सदस्यों ने केंद्र सरकार से पूछा था कि गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए उसकी तैयारियां क्या हैं और दीर्घकालिक समाधान को लेकर क्या ठोस योजना बनाई गई है। डीएमके की राज्यसभा सांसद डॉ. कनिमोझी एन.वी.एन. सोमू ने यह जानना चाहा था कि क्या केंद्र सरकार अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर एयर प्यूरीफायर लगाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है।
PARLIAMENT NEWS: सरकार ने मानी समस्या की गंभीरता
संसद में बहस के दौरान भूपेंद्र यादव ने स्वीकार किया कि वायु प्रदूषण एक गंभीर और चुनौतीपूर्ण समस्या है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जागरूकता और नियमों का सख्ती से पालन भी जरूरी है। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत देश के 130 शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने और नियमों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
एंटी-स्मॉग गन अनिवार्य, निकायों की अहम भूमिका
उन्होंने कहा कि 20 हजार वर्ग मीटर से बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। साथ ही, शहरी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय की गई है ताकि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। भूपेंद्र यादव ने बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को निर्माण और विध्वंस कचरे के निपटान के लिए तय क्षेत्र विकसित करने की सलाह दी है, जिससे धूल और अनियंत्रित कचरा फैलने पर रोक लगाई जा सके।
दिल्ली में आज से सख्त नियम लागू
राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली सरकार के नए कदम भी आज से लागू हो रहे हैं। ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम के तहत बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा। इसके अलावा, केवल बीएस-6 मानक वाले बाहरी राज्यों के वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। ग्रैप (GRAP) नियमों के तहत दिल्ली में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध जारी है। निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों पर रोक लगी हुई है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।
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