Parliament Special Session: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संसद में आज से महत्वपूर्ण चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में इस विधेयक पर सरकार का पक्ष रखेंगे और पूरी योजना को विस्तार से बताएंगे।
इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का उत्तर देंगे। लोकसभा में इस विषय पर 16 और 17 अप्रैल को बहस होगी और इसके बाद मतदान कराया जाएगा। इसके लिए कुल 18 घंटे का समय तय किया गया है।
लोकसभा में अमित शाह ने दिया स्पष्ट जवाब
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि देश में जनगणना के साथ-साथ जाति आधारित गणना भी कराई जाएगी।उन्होंने सदन को आश्वासन देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया उनके ही विभाग के अंतर्गत आती है, इसलिए इसमें किसी तरह की शंका नहीं होनी चाहिए।

जनगणना और जाति गणना दोनों साथ होंगी
गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में बताया कि देश में जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने जाति आधारित गणना को भी मंजूरी दे दी है।
उन्होंने कहा कि जब भी जनगणना होगी, उसमें लोगों की गिनती के साथ-साथ उनकी जाति से जुड़ा कॉलम भी शामिल किया जाएगा। उनके अनुसार, यह दोनों काम एक साथ ही किए जाएंगे।
Parliament Special Session: धर्म आधारित आरक्षण को बताया असंवैधानिक
अमित शाह ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव के बयान को भी असंवैधानिक बताया।
अखिलेश यादव ने लगाया था सरकार पर आरोप
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि सरकार महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को इस समय इसलिए आगे बढ़ा रही है, ताकि भविष्य में जाति जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लागू न करनी पड़े।उनका कहना था कि सरकार इस प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

सरकार ने सभी आरोपों को खारिज किया
गृह मंत्री अमित शाह ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि सरकार जाति जनगणना कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे पर किसी भी तरह का भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है।
Parliament Special Session: लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश करने का प्रस्ताव
लोकसभा में आज संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, दो हजार छब्बीस को पेश करने का प्रस्ताव कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रखा। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन विधेयक, दो हजार छब्बीस को भी सदन में प्रस्तुत करने का प्रस्ताव दिया।इसी दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, दो हजार छब्बीस को पेश करने का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने विधेयकों के पेश होने का किया विरोध
इस प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों संविधान संशोधन विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक को सदन में पेश किए जाने का विरोध किया।उन्होंने इन विधेयकों को आगे बढ़ाने पर आपत्ति जताई।
गृह मंत्री अमित शाह ने दिया जवाब
कांग्रेस के विरोध पर गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि के. सी. वेणुगोपाल को केवल तकनीकी आधार पर ही विरोध दर्ज करना चाहिए, न कि विधेयकों के गुण और दोष पर चर्चा के दौरान इस तरह का विरोध करना उचित है।अमित शाह ने यह भी कहा कि जब सदन में बहस होगी, तब सरकार विपक्ष के हर सवाल का मजबूती से जवाब देगी।

राज्यसभा में 18 अप्रैल को होगी चर्चा और मतदान
लोकसभा के बाद यह विधेयक 18 अप्रैल को राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। वहां भी इस पर चर्चा और मतदान दोनों होंगे। राज्यसभा में इस विषय पर 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
सूत्रों के अनुसार 16 और 17 अप्रैल को राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव भी कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। इसके साथ ही सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
अखिलेश यादव ने जनगणना को लेकर उठाया सवाल
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन सरकार जल्दबाजी कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले जनगणना कराई जानी चाहिए, उसके बाद ही आरक्षण लागू होना चाहिए।
किरण रिजिजू ने धर्म आधारित आरक्षण का किया विरोध
मुस्लिम महिलाओं के अलग आरक्षण की मांग पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता और यह सभी महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा विषय है।
धर्मेंद्र यादव ने विधेयकों का किया विरोध
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में यह विधेयक प्रस्तुत कर रहे हैं। इस दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने तीनों विधेयकों का विरोध किया।उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित करते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का चेन्नई में विरोध प्रदर्शन
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और उसके सहयोगी दलों ने चेन्नई में पार्टी मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी काले कपड़े पहनकर पहुंचे और उन्होंने संविधान संशोधन विधेयक तथा परिसीमन विधेयक के खिलाफ नारेबाजी की।इस दौरान उन्होंने परिसीमन विधेयक की प्रति भी जला दी।
संसद में महिला आरक्षण विधेयक पेश
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ा विधेयक संसद में पेश किया। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन से संबंधित विधेयक प्रस्तुत किया।
संशोधित प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इनमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी।इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
परिसीमन और जनगणना से जुड़े नियम स्पष्ट
विधेयक में कहा गया है कि जनसंख्या का निर्धारण केवल उसी जनगणना के आधार पर होगा जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हों। वर्तमान में 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं और परिसीमन उसी आधार पर किया जाएगा।
2029 से लागू होगा महिला आरक्षण कानून
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जो पहले ही सितंबर 2023 में पारित हो चुका है, अब संशोधित रूप में 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी है।इस कानून के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिलाओं को एक तिहाई यानी 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह व्यवस्था 15 वर्षों तक लागू रहेगी, यानी 2029, 2034 और 2039 के चुनाव शामिल होंगे।
हर चुनाव में आरक्षित सीटों में बदलाव किया जाएगा ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिल सके। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को भी इसमें आरक्षण दिया जाएगा।
परिसीमन आयोग का गठन होगा
विधेयक पारित होने के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा। इस आयोग की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।यह आयोग लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनः निर्धारण करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। रिपोर्ट पर जनता से सुझाव भी लिए जाएंगे।
सरकार की मंजूरी के बाद इसे राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और फिर लागू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि यह पूरी प्रक्रिया 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरी हो जाए।
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