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गुजरात का पतंग महोत्सव: पीएम मोदी की दूरदृष्टि से स्थानीय परंपरा बनी वैश्विक सांस्कृतिक पहचान

अहमदाबाद में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सहभागिता ने गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर फिर से रेखांकित किया। मुख्यमंत्री रहते पीएम मोदी की परिकल्पना से जन्मा यह आयोजन आज भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त प्रतीक बन चुका है।
pm modi:

pm modi: अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट सोमवार को एक ऐतिहासिक दृश्य का साक्षी बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में शिरकत की। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने पतंग उड़ाकर आपसी प्रेम, सद्भाव और वैश्विक एकता का संदेश दिया। रंग-बिरंगी पतंगों से सजा आकाश सांस्कृतिक मेल-जोल का प्रतीक बन गया।

स्थानीय परंपरा से वैश्विक मंच तक का सफर

‘मोदी स्टोरी’ नामक सोशल मीडिया हैंडल द्वारा साझा किए गए वीडियो में बताया गया कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा गुजरात में सदियों पुरानी है। कभी यह उत्सव घरों की छतों और गलियों तक सीमित था, लेकिन नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल में इसे वैश्विक पहचान दिलाने की दूरदृष्टि ने नया आयाम दिया। इस पहल ने गुजरात की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित किया।

pm modi:  सशक्त माध्यम बना पतंग महोत्सव

प्रधानमंत्री मोदी ने इस उत्सव को केवल एक आयोजन न मानकर सांस्कृतिक कूटनीति का जरिया बनाया। उनकी सोच के परिणामस्वरूप देश-विदेश से पतंगबाज, कलाकार और संस्कृति प्रेमी गुजरात पहुंचने लगे। अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत जैसे शहर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद के केंद्र बन गए, जहां भाषाओं से अधिक पतंगों ने संवाद किया।

pm modi: भारत की सॉफ्ट पावर का प्रतीक बनता उत्सव

आज गुजरात का पतंग महोत्सव विश्व के कई देशों में भारत की पहचान बन चुका है। यह आयोजन आकाश में उड़ती पतंगों के जरिए भारतीय संस्कृति, परंपरा और उत्सवधर्मिता का संदेश देता है। हर पतंग सकारात्मकता, एकता और आनंद का प्रतीक बनकर सीमाओं से परे साझा खुशी का अनुभव कराती है।

पतंग महोत्सव पर पीएम मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस अवसर की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि मकर संक्रांति के दौरान पतंग महोत्सव आकाश को रंगों और उल्लास से भर देता है। उन्होंने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मौजूदगी को सुखद बताया और कहा कि आज यह महोत्सव एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बन चुका है, जहां आकाश सभी के लिए एक साझा उत्सव है।

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