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पीएम मोदी ने की अमित शाह के भाषण की सराहना, कहा: तर्क, तथ्य और संसदीय गरिमा का मजबूत संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में दिए गए अमित शाह के भाषण की सराहना की। शाह ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, संसदीय नियमों, लोकतांत्रिक परंपराओं और लोकसभा की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
अमित शाह के भाषण पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

Amit Shah Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में दिए गए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस भाषण में संसद की परंपराओं का महत्व और देश की तरक्की के लिए मिलकर काम करने की जरूरत को अच्छी तरह समझाया गया है।

गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि गृह मंत्री अमित शाह का भाषण बेहद प्रभावशाली था। उन्होंने कहा कि यह संबोधन मजबूत तथ्यों पर आधारित था और इसमें संसदीय परंपराओं के महत्व के साथ-साथ देश के विकास के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

अमित शाह के भाषण पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
अमित शाह के भाषण पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

लोकसभा स्पीकर पर उठे बड़े सवाल

दरअसल, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है, क्योंकि लगभग चार दशकों बाद पहली बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। शाह ने इसे संसदीय राजनीति और सदन की गरिमा के लिहाज से दुखद बताया।

अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी एक राजनीतिक दल के नहीं होते, बल्कि पूरे सदन का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका काम सभी सांसदों के अधिकारों की रक्षा करना होता है। ऐसे में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना किसी साहसिक कदम की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

Amit Shah Speech: अमित शाह के भाषण पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
अमित शाह के भाषण पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

Amit Shah Speech: 13 घंटे बहस, स्पीकर पर सवाल

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर करीब 13 घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें पक्ष और विपक्ष के कुल 42 से अधिक सांसदों ने हिस्सा लिया। शाह ने कहा कि आमतौर पर स्पीकर के फैसले को अंतिम माना जाता है, लेकिन इस बार विपक्ष ने उनकी निष्पक्षता और निष्ठा पर ही सवाल उठा दिए।

गृह मंत्री ने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत मानी जाती है और दुनिया भर में भारतीय लोकतंत्र की साख है। ऐसे में यदि इस पंचायत के प्रमुख यानी स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर केवल देश के भीतर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ता है और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

स्पीकर की गरिमा और नियमों का जिक्र

अमित शाह ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी और सहयोगी दल पहले भी विपक्ष में रह चुके हैं। उस दौरान तीन बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उन्होंने कभी भी ऐसा प्रस्ताव पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाई और स्पीकर की गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ अपने अधिकारों की रक्षा की मांग भी की।

अमित शाह के भाषण पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
अमित शाह के भाषण पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

अपने संबोधन में शाह ने संसद के नियमों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लोकसभा के नियम 374 के तहत अगर सदन में अव्यवस्था या अनुशासनहीनता होती है, तो स्पीकर को संबंधित सदस्य को चेतावनी देने, नामित करने, सदन से बाहर करने या निलंबित करने का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन या विरोध करने वालों को भी सदन के नियमों के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए।

संसदीय नियमों और अनुशासन पर जोर

शाह ने नियम 375 का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर सदन में गंभीर अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है, तो कार्यवाही को स्थगित करना पड़ता है। वहीं नियम 380 के अनुसार स्पीकर को यह अधिकार है कि वे असंसदीय शब्दों या टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटवा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि असंसदीय टिप्पणियों को रिकॉर्ड में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे गलत परंपरा बनती है और आने वाली पीढ़ियों के सांसद भी वही तरीका अपनाने लगते हैं। उन्होंने बताया कि असंसदीय शब्दों की सूची संसद के गठन से लेकर अब तक कई पूर्व स्पीकरों ने तैयार की है और यह सभी सदस्यों पर लागू होती है।

लोकसभा कार्यवाही के अहम आंकड़े

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि संविधान ने विपक्ष को अधिकार दिए हैं, लेकिन विशेषाधिकार नहीं। उन्होंने कहा कि अधिकारों की रक्षा की जा सकती है, लेकिन जो लोग विशेषाधिकार समझने की गलती करते हैं, उन्हें न उनकी पार्टी और न ही जनता का समर्थन मिलता है।

अमित शाह ने लोकसभा के कामकाज से जुड़े कुछ आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि 16वीं लोकसभा के दौरान 331 बैठकें हुई थीं, जबकि 17वीं लोकसभा में 274 बैठकें हुईं। मौजूदा लोकसभा में वर्ष 2025 तक 103 बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 2025 का बजट सत्र 118 प्रतिशत उत्पादकता के साथ पूरा हुआ।

Amit Shah Speech: 202 सांसदों को बोलने का मिला अवसर

उन्होंने यह भी बताया कि 16वीं और 17वीं लोकसभा की उत्पादकता 91 प्रतिशत रही थी और 18वीं लोकसभा में भी लगभग इतनी ही उत्पादकता दर्ज की गई है। शाह के अनुसार, मौजूदा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यकाल में अधिकतम उत्पादकता देखने को मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अध्यक्ष ने शून्य काल की अवधि को बढ़ाकर लगभग पांच घंटे तक कर दिया है।

अमित शाह ने कहा कि वह करीब 30 वर्षों से विधायक और सांसद के रूप में राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उन्होंने पहले कभी ऐसा नहीं देखा कि स्पीकर ने सदस्यों को रात 12 बजे तक शून्य काल में अपने मुद्दे उठाने की अनुमति दी हो। उन्होंने बताया कि 202 सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, इसके बावजूद विपक्ष यह कहता है कि उन्हें मुद्दे उठाने का मौका नहीं मिलता।

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