Rahul Gandhi: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं और मतदान में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में राज्य की राजनीति तेज़ हो गई है, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुनाव प्रचार में भागीदारी को लेकर बनी अनिश्चितता ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेतृत्व वाले गठबंधन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। गठबंधन के भीतर तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सेलम रैली पर टिकी नजरें
डीएमके 15 अप्रैल को सेलम में ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ के तहत एक बड़ी जनसभा आयोजित करने जा रही है। इस रैली को चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के नेता इस मंच के जरिए अपनी एकजुटता दिखाना चाहते हैं, लेकिन राहुल गांधी की उपस्थिति को लेकर अभी तक कोई पुष्टि नहीं होने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
Rahul Gandhi: तालमेल को लेकर बढ़ी चिंता
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर स्पष्टता न होने से डीएमके और कांग्रेस के बीच तालमेल पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह अनिश्चितता गठबंधन की मजबूती पर असर डाल सकती है।
संयुक्त प्रचार की कमी से बढ़ी अटकलें
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और राहुल गांधी की संयुक्त उपस्थिति काफी सीमित रही है। पुडुचेरी में दोनों नेताओं ने एक ही दिन प्रचार किया, लेकिन एक मंच साझा नहीं किया। चेन्नई और कोयंबटूर में भी कोई संयुक्त सभा नहीं हुई, जिससे दोनों दलों के बीच समन्वय की कमी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
Rahul Gandhi: कांग्रेस में भी असमंजस की स्थिति
कांग्रेस के भीतर भी राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर स्पष्टता नहीं है। तमिलनाडु कांग्रेस के प्रभारी गिरीश चोडनकर ने उम्मीद जताई है कि राहुल गांधी जल्द प्रचार में शामिल होंगे, लेकिन अन्य नेताओं की चुप्पी ने संशय बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राहुल गांधी सक्रिय रूप से प्रचार में उतरते हैं, तो गठबंधन को मजबूती मिल सकती है और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, यह मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकता है।
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