RAJNATH SINGH: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश अब केवल अपनी सीमाओं के भीतर ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सरहद पार भी जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है।
सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र
तिरुवनंतपुरम में आयोजित ‘सैनिक सम्मान सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उन्होंने उरी हमला के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक,पुलवामा हमला के बाद की एयर स्ट्राइक और हाल की पहलगाम घटना के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्रवाइयों से भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई है।
RAJNATH SINGH: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बड़ा दावा
रक्षा मंत्री ने कहा कि पहलगाम में आतंकी घटना के बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत मात्र 22 मिनट में दुश्मन को करारा जवाब दिया। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाइयों में से एक बताया और कहा कि यह ऑपरेशन अभी भी जारी है।
भविष्य में और कड़ी कार्रवाई के संकेत
राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में सरहद पार से कोई भी गलत हरकत होती है, तो भारत न सिर्फ उसका मुंहतोड़ जवाब देगा, बल्कि अभूतपूर्व कार्रवाई भी करेगा।
RAJNATH SINGH: समुद्री ताकत बढ़ाने पर जोर
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में समुद्री डोमेन की अहमियत तेजी से बढ़ रही है। भारत अपनी पारंपरिक समझ और आधुनिक तकनीक को मिलाकर 2047 तक नौसेना को दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
स्वदेशी रक्षा निर्माण पर फोकस
रक्षा मंत्री ने केरल के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का उल्लेख करते हुए कहा कि यहीं भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत तैयार हुआ। उन्होंने कहा कि भारत अब शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में किसी भी बड़ी शक्ति से पीछे नहीं है।
RAJNATH SINGH: सैनिकों के सम्मान पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिक और पूर्व सैनिक देश के मजबूत स्तंभ हैं और उनकी देखभाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने ‘वन रैंक, वन पेंशन’ जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
शहीदों को श्रद्धांजलि
उन्होंने संदीप उन्नीकृष्णन को याद करते हुए कहा कि ‘मुंबई आतंकी हमले’ के दौरान उनका बलिदान देश कभी नहीं भूल सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभर में वॉर मेमोरियल बनाए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सैनिकों के योगदान से प्रेरणा मिल सके।
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