Russian Oil Imports: रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत को अमेरिका की ओर से राहत मिलने के संकेत मिले हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि भारत के लिए रूस से ऊर्जा आयात को अचानक पूरी तरह बंद करना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात के स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन इसके बावजूद वह रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहा है। रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़े कुछ प्रावधानों को फिलहाल टाल दिया है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा आयात को लेकर आगे क्या रुख रहता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Russian Oil Imports: भारत के लिए रूसी तेल का आयात अचानक बंद करना मुश्किल: रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी भारत और उज्बेकिस्तान यात्रा से पहले वॉशिंगटन में कहा कि भारत के लिए रूस से ऊर्जा आयात को एक दिन में पूरी तरह बंद करना आसान नहीं होगा। उन्होंने माना कि किसी देश के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मौजूदा तरीकों में अचानक बदलाव करना चुनौतीपूर्ण होता है। रुबियो ने कहा कि भारत ने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। हालांकि, भारत अब भी रूस से काफी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहा है। उन्होंने भारत को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी भी बताया।
Russian Oil Imports: ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ के प्रावधान टाले-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने से जुड़े कुछ प्रावधानों को फिलहाल टाल दिया। इन प्रावधानों के तहत भारत समेत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए रूस पर दबाव बढ़ाना था। अमेरिकी कांग्रेस ने हाल ही में इस संबंध में कानून को मंजूरी दी थी। इसके तहत ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। प्रस्तावित प्रावधानों में रूस की कई संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने और अमेरिका में रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी शामिल था। इन उपायों को लागू करने की एक महीने की समय सीमा 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी।
प्रतिबंधों के असर का आकलन करना चाहते हैं ट्रंप
रुबियो ने कहा कि रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ी समस्या यह है कि इनका असर केवल रूस पर ही नहीं, बल्कि भारत जैसे दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप 60 दिनों की अवधि का इस्तेमाल यह विश्लेषण करने के लिए करना चाहते हैं कि प्रतिबंधों और टैरिफ का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन इन प्रतिबंधों को लागू करने से पहले उनके व्यापक आर्थिक प्रभावों का आकलन करना चाहता है। हालांकि, भारत को रूसी तेल की खरीद के मामले में आगे कितनी राहत मिलेगी, यह अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।
भारत दौरे पर आएंगे मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 19 से 22 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर रहेंगे। इससे पहले वह उज्बेकिस्तान के समरकंद पहुंचे, जहां वह सी5+1 समूह के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस समूह में अमेरिका के साथ उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मध्य एशिया अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह क्षेत्र चीन, रूस और ईरान के बीच स्थित है और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। समरकंद के बाद रुबियो भारत के लिए रवाना होंगे। अपने दौरे के दौरान वह मुंबई और जामनगर भी जाएंगे। यहां उनकी कारोबारी नेताओं से मुलाकात होगी, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी भी शामिल हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है यह दौरा
रुबियो का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत महत्वपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है, जबकि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और आयात की लागत को ध्यान में रखना पड़ता है। रुबियो ने भारत को महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए यह स्वीकार किया है कि रूसी ऊर्जा पर निर्भरता को अचानक खत्म करना आसान नहीं है। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन का अगला कदम भारत के ऊर्जा आयात और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए अहम हो सकता है।
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