Saharanpur News: सहारनपुर को वर्ष 2016 में स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला था, लेकिन आठ साल बाद भी शहर की जमीनी हकीकत स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। शहर की कई प्रमुख सड़कें आज भी या तो निर्माणाधीन हैं या फिर पूरी तरह जर्जर अवस्था में पड़ी हुई हैं। हालात ऐसे हैं कि इन सड़कों पर चलना तो दूर, वहां ड्यूटी करना भी आम आदमी और खासतौर पर यातायात पुलिसकर्मियों के लिए चुनौती बन गया है।
घंटाघर सहित प्रमुख चौराहों पर टूटी सड़कें
शहर के केंद्र स्थल घंटाघर समेत कई ऐसे प्रमुख चौराहे हैं, जहां से रोजाना लाखों वाहन गुजरते हैं। इन चौराहों पर यातायात सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी यातायात पुलिसकर्मियों पर होती है। बावजूद इसके, सड़कें टूटी होने के कारण वाहनों की आवाजाही से दिनभर धूल के गुबार उड़ते रहते हैं।
Saharanpur News: मास्क लगाकर, वर्दी से धूल झाड़ते दिखे यातायात सिपाही
आज शहर में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। टूटी सड़कों के बीच ड्यूटी कर रहे यातायात सिपाही मास्क लगाए हुए नजर आए और बार-बार अपनी वर्दी से धूल झाड़ते दिखाई दिए। जब उनसे बातचीत की गई तो उनका दर्द साफ झलक रहा था।
यातायात कर्मी मनीष तोमर का कहना है कि क्या करें साहब, मजबूरी है। पूरे 8 घंटे यहीं खड़े रहकर ड्यूटी करनी होती है। सड़कें टूटी हुई हैं, गाड़ियां चलती हैं तो धूल ही धूल उड़ती है। अपने आप को बचाने के लिए मास्क या मफलर पहनना पड़ता है और दिन में कई बार वर्दी से धूल मिट्टी झाड़नी पड़ती है। उनका कहना है कि धूल-मिट्टी की वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है, आंखों में जलन होती है, लेकिन फिर भी ड्यूटी करनी पड़ती है।
स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल?
सवाल यह उठता है कि जब सहारनपुर स्मार्ट सिटी घोषित हो चुका है, तो फिर शहर की सड़कों की हालत इतनी बदहाल क्यों है? क्यों आज भी पुलिसकर्मियों को धूल-मिट्टी में खड़े होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है? क्या स्मार्ट सिटी सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित रह गई है?
Report BY: दीपक तिवारी






