Sambhal News: संभल जनपद में मैं जिंदा हूं साहब का दावा कर प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने वाले तेजपाल के दावे आखिर झूठे साबित हुए हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर चंदौसी तहसील के नायब तहसीलदार सतेंद्र चाहर द्वारा की गई जांच में यह खुलासा हुआ कि तेजपाल की ओर से लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
अब पढ़े क्या था मामला…
दरअसल, जहांगीरपुर गांव निवासी तेजपाल पुत्र नंद किशोर ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देते हुए अपनी पत्नी शीला और वीरपाल पर आरोप लगाया था कि उन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर उसकी 12 बीघा जमीन जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये है बेच दी है। उसने यह भी दावा किया था कि सरकारी दस्तावेजों में उसे मृत घोषित कर दिया गया है। मामले में जांच के लिए टीम जब गांव पहुंची तो मामला पूरी तरह उल्टा निकला। तेजण पत्नी शीला ने अधिकारियों को बताया कि उसका पति मानसिक पसे अस्वस्थ में रहता है और नशे की लत से ग्रसित है। शीला ने कहा कि तेजपाल मुरादाबाद में रहता है और घर आने पर उत्पात मचाता है। वह उस पर चरित्रहीन होने के आरोप लगाकर अक्सर मारपीट करता और बच्चों सहित घर से निकाल देता है।
Sambhal News: तेजपाल के सभी दावे निराधार
गांव के कई लोगों-ग्राम प्रधान जमुना प्रसाद, सचिव मनोज कुमार बीएलओ सुशील कुमार, राशन डीलर रमेश चंद्र और अन्य ग्रामीणों ने भी शपथपत्र देकर शीला के बयान की पुष्टि की। ग्रामीणों के मुताबिक, तेजपाल कई वर्षों से गांव में नहीं रह रहा है और अक्सर प्रशासनिक दफ्तरों में झूठी शिकायतें करने के लिए बदनाम है। पंचायत सहायक से हुई सत्यापन प्रक्रिया में यह साफ हो गया कि सचिव या किसी भी अधिकारी द्वारा तेजपाल के नाम से कोई मृत्यु प्रमाणपत्र जारी ही नहीं किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर चंदौसी एसडीएम आशुतोष तिवारी ने स्पष्ट किया कि तेजपाल के सभी दावे निराधार हैं और उसका आरोप झूठे तथ्यों पर आधारित है।
प्रशासन ने मामले को संवेदनशील मानते हुए तेजपाल की मानसिक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय जांच कराने की सिफारिश भी की है। वहीं गांव में अब इस पूरे प्रकरण की चर्चा बनी हुई है कि किस तरह एक व्यक्ति ने अपनी मानसिक अस्थिरता और भ्रम में ऐसा गंभीर झूठ फैलाया जिससे पत्नी व परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया।
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