Supreme Court: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 के नियम 3(सी) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस नियम को लेकर दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
याचिकाकर्ता का आरोप
याचिकाकर्ता का कहना है कि नियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करता है। उनका आरोप है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के नाम पर यह प्रावधान कुछ वर्गों के खिलाफ भेदभाव करता है और शिक्षा से बाहर करने का जोखिम पैदा कर सकता है। साथ ही, इसमें झूठी शिकायतों पर कोई सजा का प्रावधान न होने से नियम का दुरुपयोग होने का खतरा भी है।
Supreme Court: यूजीसी का उद्देश्य
यूजीसी का कहना है कि नए नियम का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान और विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमेटी गठित करने का निर्देश दिया गया है, जो शिकायतों की जांच करेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर सकेगी।
बहस: मेरिट बनाम इक्विटी
याचिका से उच्च शिक्षा में समानता बनाम आरक्षण/इक्विटी की बहस फिर गरमाने की संभावना है। पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 118 प्रतिशत बढ़ी हैं। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता की जांच करे और सामान्य वर्ग के छात्रों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
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