Supreme Court: देश में आधार कार्ड को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। Supreme Court of India में दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) में आधार बनवाने की प्रक्रिया को लेकर बड़े बदलाव की मांग की गई है। याचिका एडवोकेट Ashwini Upadhyay द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि अब केवल छह साल तक के बच्चों का ही आधार बनाया जाए। उनका तर्क है कि देश की लगभग 99% आबादी पहले ही आधार से जुड़ चुकी है, ऐसे में वयस्कों के लिए नई एनरोलमेंट प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है।
फर्जी आधार और सुरक्षा का मुद्दा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ विदेशी नागरिक फर्जी आधार बनवा रहे हैं। खासकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठियों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए पैसे देकर गलत दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
Supreme Court: आधार प्रक्रिया में बदलाव की मांग
पीआईएल में सुझाव दिया गया है कि छह साल से ऊपर के लोगों का आधार केवल तहसीलदार या एसडीएम कार्यालय में ही बनाया जाए। इससे पहचान की जांच अधिक सख्ती से हो सकेगी और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। पहले भी आधार प्रक्रिया इसी तरह सीमित थी, लेकिन बाद में इसे CSC तक विस्तारित किया गया।
सख्त नियम और चेतावनी बोर्ड
याचिका में यह भी मांग की गई है कि जहां-जहां आधार या अन्य दस्तावेज बनते हैं, वहां स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। इन बोर्डों पर फर्जी दस्तावेज बनाने पर सख्त सजा का उल्लेख हो। साथ ही, आवेदन करते समय आवेदक से लिखित अंडरटेकिंग ली जाए कि दी गई जानकारी सही है।
Supreme Court: सजा के नियम में बदलाव का प्रस्ताव
अश्विनी उपाध्याय ने फर्जी दस्तावेज बनाने वालों के लिए सजा के नियमों में भी बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान में सजा एक साथ चलती है, जिससे अपराधियों को कम सजा मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सजा क्रमवार (consecutive) होनी चाहिए, ताकि इसका डर और प्रभाव बढ़े।
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