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भारत ने लेबनान में शांति मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अंतरराष्ट्रीय अपील की

लेबनान में शांति सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपील की। 7,438 सैनिक तैनात हैं, जिनमें 642 भारतीय शामिल हैं। स्थिति अस्थिर है और सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना आवश्यक है।
लेबनान में शांति सैनिकों की सुरक्षा संकट

UNIFIL Peace Mission: ईरान युद्ध के बाद पैदा हुए हालात के बीच, इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच तनाव बढ़ गया है। इसी के बीच, भारत ने लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।भारत और 29 अन्य देशों ने बुधवार को एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया कि सभी पक्षों को हर हालात में यूएन अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईफिल) के सैनिकों और उनके ठिकानों की सुरक्षा करनी चाहिए। यह सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित की जानी चाहिए।

लेबनान में शांति मिशन जारी

बयान में यह भी कहा गया कि शांति सैनिकों को कभी भी हमले, धमकाने या किसी तरह के खतरे का सामना नहीं करना चाहिए। साथ ही, उनके साहस, पेशेवर काम और अपने दायित्व को निभाने की प्रतिबद्धता की सराहना भी की गई।यूएनआईफिल में कुल 7,438 सैनिक तैनात हैं, जिनमें 642 भारतीय शांति सैनिक शामिल हैं। इस तरह, भारतीय सैनिकों की टुकड़ी मिशन में दूसरी सबसे बड़ी टुकड़ी है।

यह शांति मिशन 1978 में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य संघर्ष विराम की निगरानी करना और लेबनान सरकार को दक्षिणी लेबनान के क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने में मदद करना है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश की मौजूदगी में, फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले संयुक्त बयान पढ़ा। इस बैठक में लेबनान की स्थिति पर चर्चा की गई।

UNIFIL Peace Mission: घाना के सैनिक गोलीबारी में घायल

यूएनआईफिल के अनुसार, पिछले सप्ताह दक्षिणी लेबनान में एक ठिकाने पर हुई भारी गोलीबारी में घाना के तीन शांति सैनिक घायल हो गए। इस हमले की निंदा करते हुए बयान में कहा गया कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि इस घटना की जांच जारी है और अभी तक किसी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। बयान में हिज़्बुल्लाह की भी आलोचना की गई और कहा गया कि इज़राइल के खिलाफ ईरान के हमलों में शामिल होना गैर-जिम्मेदाराना निर्णय था। इस कारण लेबनान को ऐसे युद्ध में खींचा गया, जिसे न तो वहां की सरकार चाहती थी और न ही जनता।

नागरिक सुरक्षा और कानून पालन अनिवार्य

इज़राइल के बारे में बयान में कहा गया कि उसे नागरिक ढांचे और घनी आबादी वाले इलाकों पर हमला नहीं करना चाहिए और लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।साथ ही, सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव जीन-पियरे लैक्रोइक्स ने सुरक्षा परिषद को बताया कि यूएनआईफिल इस समय बेहद खतरनाक और अस्थिर माहौल में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि 1 मार्च से अब तक, ब्लू लाइन के दोनों ओर 4,120 हमलों या मिसाइलों की गतिविधि दर्ज की गई है।

ब्लू लाइन पर बढ़ा तनाव

ब्लू लाइन वह सीमा है जो इज़राइल और लेबनान को अलग करती है। उन्होंने बताया कि हिज़्बुल्लाह रोज़ाना ब्लू लाइन के पार इज़राइल और सीरिया के कब्जे वाले गोलान इलाके में रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन से हमला कर रहा है। दूसरी ओर यूएनआईफिल ने देखा कि इज़राइली सेना की इकाइयों ने कई जगहों पर लेबनान की सीमा में घुसपैठ की है। साथ ही, इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच सीधी झड़पें भी हुई हैं।

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