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यूपी धर्मांतरण नेटवर्क का बड़ा खुलासा: लखीमपुर में गुप्त चर्च और ब्रेनवॉश की चौंकाने वाली सच्चाई

यूपी धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा

UP Conversion Racket: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में कुछ ऐसे स्थानों का पता चला जहां बाहर से कोई पहचान चिन्ह, बोर्ड या यीशु की तस्वीरें नहीं लगाई जातीं। इन्हें आम चर्च की तरह नहीं दिखाया जाता ताकि किसी तरह का शक न हो।

रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस और प्रशासन से बचने के लिए धर्मांतरण की इस कथित प्रक्रिया को अब “ग्रहण” नाम दिया जाता है। यूपी और नेपाल बॉर्डर क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों की जांच के लिए एक न्यूज़ वेबसाइट की टीम ने अपना हुलिया बदलकर अंदर तक पहुंचने की कोशिश की।

ब्रेनवॉश के दौरान किए गए चौंकाने वाले दावे

“अगर यीशु की प्रार्थना का असर चाहिए तो कलाई पर बंधा कलावा हटाना होगा, नहीं तो परेशानियां दूर नहीं होंगी और पूजा-पाठ से दूरी बनानी होगी।”

यह कथित बातें एक रिपोर्टर को उस समय कही गईं जब उसका मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया जा रहा था। उद्देश्य उसे धर्म परिवर्तन की दिशा में प्रभावित करना बताया गया है। इसी दौरान यह दावा भी सामने आया कि बीमारी, गरीबी और जीवन की परेशानियों से छुटकारा दिलाने का लालच देकर लोगों का धर्म बदला जा रहा है।

UP Conversion Racket: यूपी धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा
यूपी धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा

UP Conversion Racket: मजदूर बनकर 20 दिन तक चली गुप्त जांच

इस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए रिपोर्टर ने खुद को मजदूर के रूप में पेश किया और करीब 20 दिन तक खेतों में काम किया। इस दौरान उसने आसपास के लोगों से संपर्क बढ़ाया और धीरे-धीरे उन लोगों का विश्वास हासिल किया जो इस कथित नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं।

इसी दौरान गिरोह के लोगों ने उससे संपर्क किया और उसे आगे की प्रक्रिया में शामिल किया गया। गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड हुई बातचीत और घटनाओं ने कथित धर्मांतरण नेटवर्क की कई परतें उजागर कीं।

धर्मांतरण की कथित 7-स्टेप प्रक्रिया में पहले तीन चरण सामने आए

जांच के दौरान यह दावा किया गया कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया सात चरणों में पूरी की जाती है, जिनमें से पहले तीन चरण इस रिपोर्ट में सामने आए हैं। इसमें सबसे पहले व्यक्ति से संपर्क बनाया जाता है, फिर उसे मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता है और उसके बाद धार्मिक विश्वासों पर दबाव डाला जाता है।

स्टेप-1: संपर्क कैसे बनाया गया

रिपोर्टर जब लखीमपुर के दलराजपुर गांव में मजदूर बनकर पहुंचा तो उसने काम के साथ-साथ स्थानीय लोगों से बातचीत शुरू की। उसने अपनी स्थिति ऐसी बताई कि वह गरीब है, परेशान है और जीवन में कई मुश्किलों का सामना कर रहा है।

इस तरह की जानकारी धीरे-धीरे पास्टर विजय तक पहुंच गई, जो मूल रूप से नेपाल का रहने वाला बताया गया है और पिछले लगभग 30 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय बताया जाता है। दावा किया गया कि वह अपने घर में ही एक सीक्रेट चर्च चलाता है और उसके लोग आसपास के गरीब और बीमार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं।

लगभग दस दिन बाद कुछ लोग रिपोर्टर के पास आए और उसे पास्टर विजय से मिलने की सलाह दी। इसके बाद रविवार सुबह आठ बजे गुप्त चर्च में जाने का समय तय हुआ।

स्टेप-2: ब्रेनवॉश की प्रक्रिया शुरू

निर्धारित समय पर रिपोर्टर को एक सीक्रेट चर्च में ले जाया गया, जहां पास्टर विजय ने उसे अपने पास बैठाया और बातचीत शुरू की। शुरुआत में साधारण सवाल पूछे गए और फिर धीरे-धीरे धार्मिक बातें जोड़ दी गईं।

रिपोर्टर ने अपनी समस्याओं का जिक्र किया जिसमें नशे की लत, आर्थिक तंगी, परिवार का टूटना और शारीरिक कमजोरी जैसी बातें शामिल थीं। इस पर पास्टर ने कहा कि जो व्यक्ति प्रभु के करीब आता है, उसके जीवन की समस्याएं दूर होने लगती हैं और भगवान उसके साथ होते हैं।

इसी दौरान दो अन्य लोगों को भी वहां बुलाया गया, जिनमें एक सरकारी शिक्षक शिवप्रसाद गौतम और उनकी पत्नी शामिल थीं। शिक्षक के बारे में दावा किया गया कि पहले उनके जीवन में भारी आर्थिक नुकसान हुआ था और लाखों रुपये खर्च हो गए थे, लेकिन बाद में प्रार्थना के बाद उनकी समस्याएं खत्म हो गईं।

इसके बाद मोबाइल से धार्मिक संदेश पढ़कर सुनाए गए और यह समझाने की कोशिश की गई कि सही जगह आने से जीवन बदल सकता है। रिपोर्टर को यह भी कहा गया कि उसे एक या दो बार और यहां आना पड़ेगा ताकि उसकी समस्याओं का समाधान हो सके।

इसी दौरान वहां मौजूद लोगों ने उसे आश्वस्त किया कि चिंता करने की जरूरत नहीं है और वह धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। साथ ही यह भी बताया गया कि नेपाल से एक और धार्मिक व्यक्ति आने वाला है जो उसकी समस्याएं सुनकर समाधान देगा, हालांकि उसके लिए समय लगेगा।

इसके बाद रिपोर्टर के सिर पर हाथ रखकर प्रार्थना कराई गई और उससे धार्मिक वाक्य दोहरवाए गए, जिसमें उसने यह कहा कि वह खुद को प्रभु की शरण में समर्पित करता है और अपना जीवन उन्हें देता है।

शिवप्रसाद गौतम ने बताया कि जरूरत पड़ने पर पास्टर मोबाइल से प्रार्थना करेंगे और रिपोर्टर का नंबर ले लिया गया।
शिवप्रसाद गौतम ने बताया कि जरूरत पड़ने पर पास्टर मोबाइल से प्रार्थना करेंगे और रिपोर्टर का नंबर ले लिया गया।

स्टेप-3: धार्मिक प्रतीकों को हटाने का दबाव

जांच में सामने आया कि इसके बाद तीसरे चरण में धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं पर दबाव बनाया जाता है। रिपोर्टर से पूछा गया कि क्या उसने कोई ताबीज या धार्मिक धागा पहना हुआ है।

जब कलावा दिखाई दिया तो कहा गया कि यदि इसे नहीं हटाया गया तो प्रार्थना का असर नहीं होगा। यह भी दावा किया गया कि पूजा-पाठ से जुड़े प्रतीक और वस्तुएं इस प्रक्रिया को रोक देती हैं।

इसी दौरान ताबीज को स्थानीय भाषा में “जंतू” कहा गया और यह बताया गया कि यह भी प्रार्थना के प्रभाव में बाधा डालता है। यहां तक कहा गया कि गंगाजल या धार्मिक पानी जैसी चीजें भी इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।

इसके बाद कथित रूप से एक ब्लेड मंगवाया गया और रिपोर्टर की कलाई से कलावा काट दिया गया, जिसे पास्टर ने अपने पास रख लिया।

जांच में सामने आए पूरे नेटवर्क के संकेत

अब तक की जांच में यह सामने आया कि इस नेटवर्क में गांव-गांव में कुछ लोग सूचना पहुंचाने का काम करते हैं, जिन्हें इस व्यवस्था में स्लीपर सेल की तरह बताया गया है। जैसे ही कोई नया व्यक्ति आता है, उसकी जानकारी तुरंत संबंधित लोगों तक पहुंचा दी जाती है।

फिर कई लोग मिलकर उस व्यक्ति को घेरकर बातचीत करते हैं और उसे मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इसके लिए धार्मिक कहानियों, चमत्कारों और बीमारी व गरीबी से मुक्ति के दावों का सहारा लिया जाता है।

इसके साथ ही यह भी बताया जाता है कि अगर कोई व्यक्ति पुराने धार्मिक प्रतीकों को नहीं छोड़ता तो प्रार्थना का असर नहीं होगा। इस तरह धीरे-धीरे विश्वास और मानसिक दबाव बनाकर लोगों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

पूरी जांच में यह दावा सामने आया है कि यह एक संगठित तरीका हो सकता है जिसमें लोगों को पहले विश्वास में लिया जाता है, फिर मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता है और अंत में धार्मिक पहचान बदलने के लिए दबाव बनाया जाता है।

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