UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की। करीब 40 मिनट तक चली यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए। चर्चा है कि मुलाकात के दौरान 2027 चुनाव की रूपरेखा तैयार की गई है। बता दें संघ प्रमुख इन दिनों लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इसी क्रम में वह मुख्यमंत्री संघ कार्यालय पहुंचे और औपचारिक भेंट की। हालांकि इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन सियासी हलकों में इसे आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव पर फोकस
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, संगठनात्मक गतिविधियों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण राष्ट्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में 2027 का चुनाव न सिर्फ प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि संगठन की मजबूती, सामाजिक समरसता और विकास कार्यों की गति को लेकर गहन मंथन हुआ होगा। विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी रणनीतिक चर्चा की संभावना जताई जा रही है।
UP Election 2027: 2022 की जीत के बाद 2027 की तैयारी
2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत हासिल किया था। अब पार्टी की नजर 2027 पर है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इतनी पहले से हो रही रणनीतिक बैठकों से साफ है कि संगठन और सरकार दोनों ही चुनावी तैयारियों को लेकर सतर्क और सक्रिय हैं। संघ और सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना और सामाजिक आधार को व्यापक बनाना प्राथमिकता हो सकती है। बैठक में प्रदेश में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है। बुनियादी ढांचे का विस्तार, औद्योगिक निवेश, कानून-व्यवस्था की स्थिति और रोजगार सृजन जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और निवेश आकर्षित करने को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करते रहे हैं। ऐसे में संघ नेतृत्व के साथ इन विषयों पर फीडबैक और सुझावों का आदान-प्रदान भी अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। संघ का जमीनी नेटवर्क और कार्यकर्ताओं की सक्रियता चुनावी रणनीति में निर्णायक भूमिका निभाती है। संभावना है कि आगामी महीनों में सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष जनसंपर्क अभियान चलाए जाएं। इसके लिए संगठन और सरकार के बीच तालमेल को और सुदृढ़ करने पर बल दिया गया होगा।
विपक्ष की नजर भी टिकी
इस मुलाकात पर विपक्षी दलों की भी पैनी नजर है। विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बता सकता है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे सामान्य संगठनात्मक संवाद और मार्गदर्शन की प्रक्रिया बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में संघ की भूमिका हमेशा प्रभावशाली रही है। ऐसे में संघ प्रमुख और मुख्यमंत्री की यह मुलाकात आने वाले समय की सियासी दिशा का संकेत मानी जा रही है।






