UP News: रामपुर जिले के शाहबाद कस्बे में बंदरों की शरारत ने एक परिवार की नींद उड़ा दी। मोहल्ला बेदान के निवासी हामिद के घर की छत पर सूखते नोटों पर बंदरों ने धावा बोल दिया। नतीजा आसमान से नोटों की बरसात हो गई और मोहल्ले के बच्चों ने मौके का फायदा उठाकर 21,500 रुपये लूट लिए। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है जहां बंदरों की चालाकी और बच्चों की लालच पर सवाल उठ रहे हैं।
बंदरों ने किया नोटों पर हमला
हामिद ने बताया कि उनके पास रखे करीब एक लाख रुपये किसी कारणवश भीग गए थे। इन्हें सूखाने के लिए उन्होंने छत पर फैला दिया और परिवार का एक सदस्य पहरा देने के लिए वहां खड़ा था। लेकिन भाग्य ने उनका साथ छोड़ दिया। आसपास घूम रहे बंदरों का झुंड अचानक छत पर चढ़ आया। डरकर परिवार का सदस्य नीचे भागा तो बंदरों ने नोटों पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। उन्होंने नोट इकट्ठा किए छत पर बैठे और उन्हें नीचे फेंकने लगे।
नीचे सड़क पर नोटों की बारिश होते देख मोहल्ले के बच्चे भेड़ की तरह टूट पड़े। चंद मिनटों में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे नोट चुन-चुनकर जेबों में ठूंसते रहे और कुछ तो भाग ही गए। हामिद ने शोर मचाया लोगों को बुलाया और जैसे-तैसे कुछ नोट इकट्ठे किए। लेकिन गिनती करने पर 21,500 रुपये गायब मिले। हामिद ने बच्चों के अभिभावकों से पैसे मांगने की कोशिश की मगर ज्यादातर इनकार कर गए।

बंदरों की शरारत का नया अध्याय
यह घटना शाहबाद में बंदरों की शरारतों का नया अध्याय जोड़ती है। इससे पहले कोतवाली के सामने डायल 112 के पुलिसकर्मियों का वॉलेट बंदरों ने छीन लिया था। उन्होंने पेड़ पर चढ़कर नोट फेंके जिससे सड़क पर हड़कंप मच गया। एक अन्य घटना में तहसील कार्यालय के बाहर बैनामा कराने आए लोगों का ढाई लाख रुपये भरा थैला बंदर ले उड़े। थैला पेड़ पर लटका तो नोट नीचे बरसे लेकिन रकम की पूरी वसूली नहीं हो सकी।
बंदरों के आतंक से लोग परेशान
स्थानीय लोग बंदरों के आतंक से त्रस्त हैं। शाहबाद जैसे छोटे कस्बों में बंदरों की बढ़ती संख्या समस्या बन चुकी है। ये फल-सब्जी की दुकानों से लेकर घरों तक पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के कटाव और कचरे के ढेरों से बंदर शहरों में घुस आते हैं। प्रशासन ने वन विभाग से शिकायतें मिलने पर कभी-कभी जाल और भगाने की कोशिश की लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। हामिद जैसे पीड़ितों की परेशानी बढ़ रही है। वे कहते हैं पैसे सूखाने का फैसला गलत था लेकिन बंदरों का ऐसा हमला सोचा भी नहीं था। मोहल्ले में देर रात तक बहस चलती रही। कुछ ने बच्चों को दोष दिया तो कुछ ने अभिभावकों की लापरवाही पर सवाल उठाए। एक बुजुर्ग ने कहा बंदरों को भगाओ या बच्चों को सिखाओ नहीं तो ऐसी घटनाएं रोज होंगी।
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