UP News: वृंदावन के विश्वप्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की संपत्तियां केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान में भी मंदिर से जुड़ी अचल संपत्तियों के प्रमाण सामने आए हैं। मंदिर के सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी ने दावा किया है कि पाकिस्तान के सिंध, मुल्तान और सियालकोट क्षेत्रों में ठाकुर बांकेबिहारी जी के नाम पर प्राचीन मंदिर और हवेलियां दर्ज हैं।
प्रबंधन समिति की कार्रवाई से बढ़ी उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने हाल ही में राजस्थान के कोटा में मंदिर की लगभग 15 हेक्टेयर भूमि की पहचान की है। इसके बाद अब देश-विदेश में फैली मंदिर संपत्तियों के संरक्षण को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं। समिति ने विभिन्न राज्यों के जिलाधिकारियों के माध्यम से पत्राचार शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मंदिर की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित किया जा सके।
UP News: ऐतिहासिक दान की लंबी परंपरा
सेवायत के अनुसार, ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर को सदियों से राजा-महाराजाओं और भक्तों द्वारा भूमि, भवन और आभूषण दान में दिए जाते रहे हैं। इन दानदाताओं में हिंदू शासकों के साथ-साथ मुस्लिम नवाबों के नाम भी ऐतिहासिक ग्रंथों में दर्ज हैं। मंदिर की स्थापना के समय भरतपुर के महाराजा द्वारा बगीचा दान किए जाने का उल्लेख भी मिलता है।
ग्रंथों में दर्ज हैं संपत्तियों के प्रमाण
प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी का कहना है कि मंदिर की संपत्तियों का उल्लेख श्रीस्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ, केलिमालजु, कृपा कोर, कथा हरिदास बिहारी की और ब्रजभूमि इन मुगल टाइम्स जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है। इनमें दिल्ली के फराशखाना क्षेत्र और वर्तमान पाकिस्तान के सिंध व मुल्तान में स्थित संपत्तियों का विवरण शामिल है।
UP News: संरक्षण की दिशा में अगला कदम
मंदिर प्रशासन का कहना है कि सभी प्रमाणों के आधार पर संपत्तियों की सूची तैयार कर उनके संरक्षण की प्रक्रिया तेज की जाएगी, ताकि ठाकुर बांकेबिहारी जी की विरासत सुरक्षित रह सके।







