UP Police: उत्तर प्रदेश पुलिस के निलंबित सर्किल ऑफिसर (सीओ) ऋषिकांत शुक्ला की कथित बेनामी संपत्तियों की जांच अब तेज हो गई है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस टीम गौतमबुद्ध नगर जिले की तीनों प्राधिकरणों में उनकी संपत्तियों का ब्योरा खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति के खुलासे के बाद पूरे पुलिस विभाग में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है।
संपत्तियों की जानकारी जुटा रही टीम
सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस की टीम नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण में सीओ से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियों को इन क्षेत्रों में कम से कम तीन बेनामी संपत्तियों के होने की सूचना मिली है। इन संपत्तियों को किन लोगों के नाम पर खरीदा गया है, इसकी पड़ताल की जा रही है। ऋषिकांत शुक्ला का पुलिस करियर भी जांच के दायरे में है। वह वर्ष 1998 से 2006 तक कानपुर में दरोगा के पद पर तैनात रहे और इसके बाद दिसंबर 2006 में इंस्पेक्टर बने। बाद में पदोन्नति पाकर सर्किल ऑफिसर बने और हाल ही में मैनपुरी में तैनात थे। इसी दौरान उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच शुरू हुई।
UP Police: 100 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित
कानपुर पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले करीब दस वर्षों में ऋषिकांत शुक्ला ने अपने परिवार, सहयोगियों और करीबी लोगों के नाम पर लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की है। एसआईटी जांच के आधार पर शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। जांच के दौरान 12 अलग-अलग स्थानों पर लगभग 92 करोड़ रुपये की संपत्तियों का पता चला है। इसके अलावा नोएडा क्षेत्र में करीब आठ करोड़ रुपये की तीन अन्य बेनामी संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों का वास्तविक मालिक कौन है और इन्हें किन नामों पर खरीदा गया, इसकी जानकारी जुटाने के लिए विजिलेंस टीम लगातार रिकॉर्ड खंगाल रही है।
जांच में दस पुलिसकर्मियों के नाम आए सामने
बताया जा रहा है कि शासन स्तर पर पिछले साल 3 नवंबर को इस मामले में जांच के आदेश दिए गए थे। शासन में तैनात सचिव ने प्रमुख सचिव विजिलेंस को पत्र भेजकर आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच शुरू कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) की ओर से भी जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। जांच के दौरान सीओ ऋषिकांत शुक्ला के साथ जुड़े करीब दस पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए हैं। विजिलेंस टीम अब यह भी पता लगा रही है कि इन लोगों के नाम पर कहीं संपत्तियां तो नहीं खरीदी गईं। फिलहाल, विजिलेंस की जांच जारी है और जैसे-जैसे दस्तावेज सामने आ रहे हैं, मामले में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे पुलिस विभाग में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं।







