Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवास की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश के आठ शहरों के विकास के लिए 425 करोड़ रुपये की शुरुआती धनराशि को मंजूरी दी गई है। इस फैसले का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही आबादी के लिए बेहतर और सुव्यवस्थित शहरी ढांचा तैयार करना है।
इन आठ शहरों में शुरू होगा नया विकास
सरकार की इस योजना से प्रदेश के कई ऐसे शहरों को फायदा मिलेगा जहां तेजी से आबादी बढ़ रही है और आधुनिक सुविधाओं की जरूरत महसूस की जा रही है। जिन शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है उनमें बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ प्रमुख हैं।इन शहरों में नए उपनगर और सैटेलाइट टाउनशिप विकसित किए जाएंगे ताकि लोगों को बेहतर आवास, चौड़ी सड़कें, बिजली, पानी और जल निकासी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
Uttar Pradesh: सुनियोजित शहरी विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना का उद्देश्य शहरों के अनियोजित फैलाव को रोकना और व्यवस्थित तरीके से नए आवासीय क्षेत्र विकसित करना है। योजना के तहत नए शहरों या टाउनशिप के विकास के लिए जमीन अधिग्रहण में आने वाले खर्च का अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में देती है।यह राशि विकास प्राधिकरणों को दी जाती है, जिसे उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर वापस करना होता है।
Uttar Pradesh: 20 साल में लौटानी होगी राशि
योजना के नियमों के अनुसार, विकास प्राधिकरणों को दी गई सीड कैपिटल 20 वर्षों के भीतर राज्य सरकार को लौटानी होगी। इससे सरकार पर तत्काल वित्तीय दबाव भी नहीं पड़ता और शहरों के विकास की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है।
योजना के लिए बड़ा बजट प्रावधान
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 3000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। अभी जारी किए गए 425 करोड़ रुपये इसी बजट का पहला चरण माने जा रहे हैं, जिसके माध्यम से शुरुआती विकास कार्यों को गति दी जाएगी।
रोजगार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से सिर्फ शहरों का विस्तार ही नहीं होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। नए आवासीय क्षेत्रों के निर्माण से रियल एस्टेट, निर्माण क्षेत्र और छोटे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।साथ ही बड़े शहरों पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने में भी यह योजना अहम भूमिका निभा सकती है।प्रदेश में बेहतर शहरी ढांचा विकसित करने की दिशा में उठाया गया यह कदम आने वाले समय में कई शहरों की तस्वीर बदल सकता है और लोगों को आधुनिक सुविधाओं से लैस रहने का बेहतर विकल्प प्रदान कर सकता है।
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