Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश ने सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता का नया मानक स्थापित करते हुए जेम पोर्टल पर देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश ने 22,337 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड खरीद दर्ज की, जो न केवल प्रशासनिक सुधारों का प्रमाण है बल्कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता को भी दर्शाता है। इस उपलब्धि की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे राज्य की पारदर्शी नीतियों का परिणाम बताया।
रिवर्स ऑक्शन से 9700 करोड़ की बड़ी बचत
सरकार को जेम पोर्टल की रिवर्स ऑक्शन प्रणाली के जरिए 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। यह बचत दर्शाती है कि प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया ने सरकारी खर्च को काफी हद तक नियंत्रित किया है। इसके साथ ही खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने से शिकायतों में 80 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जिससे पूरी प्रणाली तेज और प्रभावी बनी है।
Uttar Pradesh:एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों को मिला बड़ा बढ़ावा
प्रदेश की इस सफलता में सूक्ष्म और लघु उद्योगों की अहम भूमिका रही है। कुल खरीद में इनका योगदान 43 प्रतिशत से बढ़कर 55 प्रतिशत तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि इस वृद्धि में 82 प्रतिशत योगदान उत्तर प्रदेश के ही स्थानीय उद्योगों का है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य सरकार की नीतियां स्थानीय उद्यमियों को सशक्त बनाने में कारगर साबित हो रही हैं।
Uttar Pradesh: महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप उद्यमियों की मजबूत भागीदारी
जेम पोर्टल के जरिए महिला उद्यमियों के व्यवसाय में 44 प्रतिशत, एससी-एसटी उद्यमियों में 48 प्रतिशत और स्टार्टअप्स में 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह समावेशी विकास का संकेत है, जहां हर वर्ग को समान अवसर मिल रहा है और आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है।बेहतर खरीद प्रणाली का असर यह भी रहा कि उत्तर प्रदेश के विक्रेताओं को कुल 42,648 करोड़ रुपये का व्यवसाय प्राप्त हुआ। इसमें से 15,617 करोड़ रुपये का कारोबार राज्य के भीतर हुआ, जबकि शेष 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार केंद्र सरकार और अन्य राज्यों से मिला। यह प्रदेश के विक्रेताओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।
जेम पोर्टल को अनिवार्य बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जेम पोर्टल पर खरीद को अनिवार्य रूप से लागू करें। साथ ही, Government e-Marketplace को कोषागार प्रणाली से जोड़ने और स्थायी क्रय समितियों के गठन पर भी जोर दिया गया है, ताकि खरीद प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और पारदर्शी बन सके।उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक सुधारों की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही नीति और तकनीक के समन्वय से सरकारी तंत्र को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाया जा सकता है।
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